पटना। मधुबनी के रामपट्टी स्थित मंडल कारागार में न्यायिक हिरासत के दौरान 19 वर्षीय रोशन यादव की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस मामले में आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने 22 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र निगरानी और जांच कराने का आग्रह किया है।
रोशन यादव की मौत 10 अगस्त 2026 को मंडल कारागार, रामपट्टी, मधुबनी में हुई थी। वह 27 मई 2026 से न्यायिक हिरासत में था। जेल प्रशासन की ओर से उसकी मौत का कारण फांसी बताया गया है। हालांकि, मृतक के परिजनों ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए शरीर पर कई चोट के निशान होने का आरोप लगाया है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि रोशन की गिरफ्तारी की लिखित सूचना उसके परिजनों को नहीं दी गई थी।
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में कहा है कि मामले की परिस्थितियां गंभीर हैं और मानवाधिकार आयोग की स्वतंत्र निगरानी जरूरी है। उन्होंने आयोग से बिहार के पुलिस महानिदेशक और कारा महानिदेशक से इस मामले में रिपोर्ट तलब करने की मांग की है।
गिरफ्तारी से मौत तक की CCTV फुटेज मांगी
तेजस्वी यादव ने NHRC से आग्रह किया है कि हिरासत में मौत से जुड़े आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन की जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से गिरफ्तारी के समय से लेकर मौत तक की CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की है। पत्र में दो अलग-अलग पुलिस थानों से संबंधित CCTV फुटेज उपलब्ध कराने और उनकी जांच की बात कही गई है। इसके अलावा उन्होंने हिरासत के दौरान अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराए जाने, परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना दिए जाने और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी जैसी प्रक्रियाओं के पालन की भी जांच कराने का अनुरोध किया है।
पोस्टमार्टम और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट तलब करने की मांग
तेजस्वी यादव ने आयोग से यह भी आग्रह किया है कि मामले से संबंधित पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इनक्वेस्ट रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट एक निर्धारित समयसीमा के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत कराने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर मौत की वास्तविक परिस्थितियों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल हो सकती है। मधुबनी प्रशासन की ओर से पहले ही संकेत दिया गया है कि आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मामले में मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी और उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।
गरीब परिवार से था रोशन यादव
पत्र के अनुसार, मृतक रोशन यादव आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखता था। उसका परिवार उसकी विधवा मां और दो बहनों पर निर्भर बताया गया है। ऐसे में परिवार की स्थिति को देखते हुए तेजस्वी यादव ने आयोग से पीड़ित परिवार को उचित राहत उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने NHRC से कहा है कि परिवार को जांच की प्रगति और कार्रवाई से लगातार अवगत कराया जाए तथा आयोग अपनी जांच के आधार पर जो भी उचित राहत समझे, वह परिवार को उपलब्ध कराई जाए।
मौत के कारण को लेकर उठे सवाल
जेल प्रशासन द्वारा मौत का कारण फांसी बताया गया है, लेकिन परिजनों की ओर से शरीर पर चोट के निशान होने का दावा किए जाने के बाद मामले में सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मजिस्ट्रियल जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों में मौत की परिस्थितियों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
तेजस्वी यादव द्वारा NHRC को भेजे गए पत्र के बाद मामले ने राजनीतिक और मानवाधिकार दोनों स्तरों पर ध्यान खींचा है। आयोग की ओर से रिपोर्ट तलब किए जाने या अन्य कार्रवाई किए जाने पर रोशन यादव की मौत से जुड़े कई सवालों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, मामला मजिस्ट्रियल जांच के साथ-साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया गया है। अब नजर इस बात पर है कि NHRC इस शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है और बिहार सरकार तथा संबंधित अधिकारियों से किस तरह की रिपोर्ट मांगता है।