मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले के बलिराजगढ़ में हुए गोलीकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया है। पुलिस की वर्दी पहनकर कानून की रक्षा करने वाला एक एएसआई अब खुद हत्या के गंभीर आरोपों में घिरा है। दो नवंबर की देर रात हुई इस घटना में एक ग्रामीण की जान चली गई, जबकि तीन अन्य लोग गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद से आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह फरार है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दिन-रात एक कर रही हैं, लेकिन 48 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला है।

इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी एएसआई के पिता रवींद्र सिंह भी हत्या के एक मामले में सजा काट चुके थे। ग्रामीणों के मुताबिक, रवींद्र सिंह सेना में जवान थे और नौकरी के दौरान अपने साथी जवानों की हत्या के मामले में गिरफ्तार हुए थे। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 14 साल जेल में सजा काटी थी। पिछले वर्ष उनका निधन हो गया था। हालांकि, यह जानकारी फिलहाल ग्रामीणों के हवाले से सामने आई है।

नेपाल तक पहुंची पुलिस की तलाश, 12 टीमें कर रहीं छापेमारी

बलिराजगढ़ गोलीकांड के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी योगेंद्र कुमार ने 12 विशेष टीमों का गठन किया है। इनमें चार टीमें नेपाल भेजी गई हैं। पुलिस को आशंका है कि वारदात के बाद आरोपी सीमा पार भाग सकता है।

बुधवार शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उसकी सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई है। एसएसपी ने कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए पुलिस सभी जरूरी कदम उठाएगी।

महिला के घर में घुसने के बाद शुरू हुआ पूरा विवाद

पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, घटना दो नवंबर की रात करीब 11 बजकर 53 मिनट की है। बलिराजगढ़ के धत्ता टोल में डायल 112 को सूचना मिली थी कि ग्रामीणों ने एक पुलिस अधिकारी को घर में बंद कर रखा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो वहां अफरातफरी का माहौल था। चार लोग गोली लगने से घायल पड़े थे।

डायल 112 में तैनात एसआई राम मनोहर सिंह के आवेदन पर दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल की सुरक्षा में तैनात एएसआई चंद्रमोहन सिंह एक महिला के घर में घुस गए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें घर के अंदर बंद कर दिया। आरोप है कि एएसआई ने खिड़की के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश की। ग्रामीणों द्वारा रोके जाने पर उन्होंने अपनी सर्विस पिस्टल से चार राउंड गोलियां चला दीं।

इस गोलीबारी में अशोक यादव (45) की मौत हो गई। वहीं, विजेंद्र यादव उर्फ विजुन यादव (55), धनिकलाल यादव (60) और फूलो देवी (40) गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक की पत्नी अस्मिता देवी के आवेदन पर भी हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है।

किसी के गर्दन में गोली, तो किसी के पेट में लगी चोट

गोलीकांड में घायल तीनों लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। विजेंद्र यादव की गर्दन में गोली लगी थी। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें डीएमसीएच से आईजीआईएमएस पटना रेफर किया गया। फूलो देवी के पेट में गोली लगी है और उनका इलाज दरभंगा के एक निजी अस्पताल में जारी है। वहीं, धनिकलाल यादव के पैर में गोली लगी है और उनका इलाज मधुबनी सदर अस्पताल में हो रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विजेंद्र यादव और फूलो देवी की हालत में कुछ सुधार हुआ है। घायलों के इलाज के लिए प्रशासन की ओर से रक्त समेत जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था कराई गई है।

सुरक्षा के लिए बना पुलिस पिकेट खाली, उठने लगे सवाल

इस घटना ने बलिराजगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल दी है। ऐतिहासिक बलिराजगढ़ गढ़ परिसर में उत्खनन कार्य की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके लिए एक पुलिस पिकेट भी बनाया गया था। लेकिन गोलीकांड के बाद पिकेट में सन्नाटा पसरा हुआ है।

बताया जा रहा है कि सुरक्षा में लगाए गए जवान अंबेडकर आवासीय विद्यालय में शिफ्ट थे। अब घटना के बाद पिकेट खाली पड़ा है। न तो वहां जवान दिखाई दे रहे हैं और न ही सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां नजर आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस जगह की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, वहां आखिर ऐसी स्थिति कैसे पैदा हो गई?

आज तेजस्वी यादव पहुंचेंगे पीड़ित परिवार से मिलने

गोलीकांड को लेकर बिहार की सियासत भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पांच नवंबर को बलिराजगढ़ पहुंचकर मृतक अशोक यादव के परिजनों से मुलाकात करेंगे। उनके दौरे को लेकर राजद नेताओं ने मधुबनी में बैठक कर रणनीति तैयार की है। बैठक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय और पूर्व विधायक भारत भूषण मंडल समेत कई नेता मौजूद रहे। राजद इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कानून की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला आरोपी एएसआई आखिर कहां छिपा है? पुलिस की 12 टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं और नेपाल तक छापेमारी हो रही है। अब देखना होगा कि आरोपी कब तक कानून के शिकंजे में आता है और पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलता है।