Bihar Land Fraud: मधेपुरा जिले में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और पद के कथित दुरुपयोग के मामले में उदाकिशुनगंज के तत्कालीन भूमि सुधार उपसमाहर्ता आमिर अहमद समेत सात लोगों के खिलाफ फुलौत थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. मामला कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ है. आरोप है कि अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से 37 डिसमिल जमीन के नामांतरण और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई.
मामले में तत्कालीन DCLR आमिर अहमद, चौसा के तत्कालीन CO आशुतोष कुमार, वर्तमान में बिहटा के CO के पद पर तैनात राकेश कुमार सिंह, तत्कालीन हल्का कर्मचारी सह राजस्व अधिकारी दयानंद पंडित के अलावा अजीत पासवान, रणवीर कुमार उर्फ मंटू यादव और गुरेश मेहता को आरोपित बनाया गया है. इनमें आशुतोष कुमार और दयानंद पंडित सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
कोर्ट के आदेश के बाद भी एक साल तक दर्ज नहीं हुई FIR
फुलौत पूर्वी वार्ड संख्या-5 निवासी बासुदेव साह ने जमीन विवाद को लेकर 7 अगस्त 2025 को उदाकिशुनगंज अनुमंडल व्यवहार न्यायालय में परिवाद दायर किया था. कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 23 अगस्त 2025 को फुलौत थाना पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज नहीं किया.
करीब एक साल बाद 12 अगस्त 2026 को फुलौत थाना में कांड संख्या 51/26 दर्ज किया गया. परिवादी के अधिवक्ता मंजीत कुमार का आरोप है कि मामला अधिकारियों से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई में देरी हुई. उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर पटना हाईकोर्ट के साथ-साथ जिला पदाधिकारी और मधेपुरा के पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया गया.
इसके बाद सूचना के अधिकार के तहत भी पुलिस से मामले की जानकारी मांगी गई. इन प्रयासों के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई.
37 डिसमिल जमीन को लेकर है पूरा विवाद
मामला चौसा अंचल के फुलौत मौजा स्थित 37 डिसमिल जमीन से जुड़ा है. परिवादी बासुदेव साह का दावा है कि जमीन उनके पिता बाबूलाल साह और अन्य हिस्सेदारों के नाम दर्ज है. उनका कहना है कि उनके पिता या परिवार के किसी सदस्य ने इस जमीन की बिक्री नहीं की.
आरोप है कि इसके बावजूद अजीत पासवान ने जमीन पर अपना दावा करते हुए उसका निबंधन करा लिया. इसके बाद उनके नाम पर दाखिल-खारिज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई.
परिवादी का आरोप है कि नामांतरण के दौरान मूल दस्तावेजों का सही तरीके से अवलोकन किए बिना तत्कालीन CO और हल्का कर्मचारी ने दाखिल-खारिज की कार्रवाई कर दी. उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने प्रभाव में आकर जमीन का नामांतरण गलत तरीके से स्वीकार किया.
आपत्ति के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
बासुदेव साह के अनुसार, जमीन की बिक्री की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अंचल कार्यालय पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश की. उनका आरोप है कि तत्कालीन हल्का कर्मचारी और CO ने उनकी आपत्ति पर उचित कार्रवाई नहीं की.
इसके बाद उन्होंने आरोपित के नाम हुए नामांतरण के खिलाफ भूमि सुधार उपसमाहर्ता के कार्यालय में 8 जुलाई 2020 को अपील दायर की. इस मामले का वाद संख्या 11/20-21 था.
परिवादी के अनुसार, 14 जुलाई 2020 को मामले में सुनवाई हुई. आरोप है कि सुनवाई के दौरान भी मूल दस्तावेजों का पर्याप्त अवलोकन नहीं किया गया. बाद में 17 मई 2025 को भूमि सुधार उपसमाहर्ता ने वाद खारिज कर दिया.
इसी फैसले को लेकर तत्कालीन DCLR आमिर अहमद पर पद के कथित दुरुपयोग और कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है.
अधिकारियों पर भी लगाए गए गंभीर आरोप
परिवादी ने आरोप लगाया है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों और नामांतरण की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया. उनका कहना है कि जब उन्होंने स्थानीय स्तर पर शिकायत की तो उनकी बात पर कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया.
मामले में तत्कालीन DCLR समेत राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों को भी आरोपित बनाए जाने के बाद अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
पूर्व DCLR ने क्या कहा
मामले में आरोपित तत्कालीन DCLR आमिर अहमद ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया देने के बजाय वर्तमान भूमि सुधार उपसमाहर्ता से जानकारी लेने की बात कही.
फुलौत थानाध्यक्ष वरुण कुमार शर्मा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर उदाकिशुनगंज के पूर्व DCLR और चौसा के दो पूर्व CO समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच प्रक्रिया जारी है.
पुलिस अब जमीन से जुड़े दस्तावेजों, नामांतरण और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के साथ-साथ मामले में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.