Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई में एक और बड़ी सफलता मिली है. भागलपुर की विशेष निगरानी अदालत ने मधेपुरा के तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी डॉ. पारस नाथ प्रसाद को रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिया है. करीब 16 साल पुराने इस मामले में आरोपी को 35 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था. दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है. अदालत में सजा के बिंदु पर 31 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी.
यह मामला साल 2010 का है. आरोप था कि तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी डॉ. पारस नाथ प्रसाद ने प्रज्ञा कृषक सेवा स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड का निबंधन करने के एवज में परिवादी अजय रंजन से 40 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी. इस शिकायत के आधार पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई की और 23 जून 2010 को आरोपी को 35 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था.
9 गवाहों की हुई गवाही
इस मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 48/2010 और विशेष वाद संख्या 17/2010 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. तत्कालीन अनुसंधानकर्ता अमृतेन्दु शेखर ठाकुर, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना ने मामले की जांच कर समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया था. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 गवाहों की गवाही कराई गई.
बिहार सरकार की ओर से प्रभारी विशेष लोक अभियोजक निगरानी, भागलपुर राम बदन कुमार चौधरी ने अदालत में प्रभावी तरीके से पक्ष रखा. दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायालय निगरानी के न्यायाधीश दीपक कुमार-01 ने 30 अक्टूबर 2026 को डॉ. पारस नाथ प्रसाद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषी करार दिया.
2026 में अब तक 24 मामलों में लोकसेवक दोषी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 24 मामलों में न्यायालय ने लोकसेवकों को दोषी करार दिया है. ब्यूरो ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियोजन की बड़ी उपलब्धि बताया है.
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 से 2024 तक के 25 वर्षों में औसतन हर साल 5.6 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई थी. जबकि वर्ष 2026 में अब तक यह आंकड़ा औसत से करीब 4.3 गुना अधिक हो चुका है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है.