लखीसराय : बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध श्री इंद्रदमेश्वर महादेव अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने कहा है कि जांच टीम को लखीसराय भेजा जा रहा है। न्यास परिषद और जिला प्रशासन की टीम संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी।

सोमवार को अशोकधाम मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। सावन की सोमवारी होने के कारण सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। इसी दौरान अचानक अफवाह फैलने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए।

हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

धार्मिक न्यास परिषद ने लिया संज्ञान

अशोकधाम मंदिर में हुई घटना को बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने गंभीरता से लिया है। परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जांच टीम को लखीसराय भेजा जा रहा है। जांच टीम घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही हादसे के कारणों और उस समय मंदिर परिसर में मौजूद व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाएगी।

उन्होंने कहा कि धार्मिक न्यास परिषद से जुड़े सभी मंदिरों की व्यवस्था को लेकर परिषद गंभीर है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और किसी भी मंदिर में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जिला प्रशासन के साथ मिलकर होगी जांच

इस मामले में धार्मिक न्यास परिषद और जिला प्रशासन की टीम संयुक्त रूप से जांच करेगी। जांच के दौरान मंदिर परिसर में भीड़ की स्थिति, प्रवेश और निकास की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों की पड़ताल की जा सकती है।

इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि हादसे से पहले किस तरह की स्थिति बनी थी और अफवाह फैलने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए। जांच में सामने आने वाली रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जाने की संभावना है।

अफवाह बनी भगदड़ की बड़ी वजह?

हादसे को लेकर शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आई कि मंदिर परिसर के आसपास बिजली के तार या पोल गिरने और करंट आने की अफवाह फैली। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग एक साथ सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

अब जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि अफवाह की शुरुआत कैसे हुई और क्या वास्तव में बिजली से जुड़ी कोई घटना हुई थी या केवल अफवाह के कारण लोगों में डर पैदा हुआ। प्रशासन इस पहलू की भी जांच करेगा, ताकि भविष्य में इस तरह की अफवाहों के कारण बड़े हादसे को रोका जा सके।

मंदिरों में भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल

अशोकधाम की घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख पर्वों पर मंदिरों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रास्ते, बैरिकेडिंग, पर्याप्त पुलिस बल, मेडिकल टीम, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है। धार्मिक न्यास परिषद का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। जांच के बाद यदि व्यवस्था में कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए ठोस उपाय किए जा सकते हैं।

आगे क्या होगा?

जांच टीम के लखीसराय पहुंचने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों, मंदिर प्रबंधन तथा प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी ली जा सकती है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मची।

अशोकधाम मंदिर में हुई घटना ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। अब लोगों की नजर धार्मिक न्यास परिषद और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच पर है। उम्मीद है कि जांच के बाद सामने आने वाली कमियों को दूर कर ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे आने वाले समय में धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।