लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी पर बिहार के लखीसराय जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर, अशोकधाम के पास सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। इस हादसे में अब तक 8 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
शुरुआत में इस हादसे में सात महिलाओं की मौत की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि घायलों की स्थिति को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
करंट से नहीं, भगदड़ में गई जान
हादसे के तुरंत बाद यह खबर सामने आई थी कि मंदिर के पास 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार गिरने से करंट फैल गया और श्रद्धालुओं की मौत हुई। हालांकि, जिला प्रशासन ने इस दावे को खारिज कर दिया है। लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने घटना की वास्तविक वजह भगदड़ बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय अशोकधाम हॉल्ट पर दोनों ओर से ट्रेन आ गई थी। ट्रेन को देखकर कुछ युवकों ने अचानक भागना शुरू कर दिया। युवकों की इस भाग-दौड़ के दौरान बिजली का एक पोल गिर गया।
पोल गिरने के बाद मौके पर करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। प्रशासन के अनुसार, उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और बिजली का तार भी कवर किया हुआ था। इसके बावजूद करंट लगने की अफवाह सुनकर श्रद्धालुओं में अचानक दहशत फैल गई।
अफवाह के कारण भीड़ में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। इसी दौरान कई श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। भीड़ में दबने और कुचलने से आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल हो गए।
सावन की सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़
अशोकधाम मंदिर लखीसराय ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। खासकर सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी थी। बड़ी संख्या में लोग भगवान इंद्रदमनेश्वर महादेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान अशोकधाम हॉल्ट के पास अचानक अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। बताया जाता है कि मंदिर में मुख्य शिव मंदिर के अलावा मां पार्वती, नंदी महाराज और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। धार्मिक आस्था के कारण सावन में यहां दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा प्रशासन
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को भीड़ से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल भेजा गया। प्रशासन की टीमें मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हैं।
अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि आखिर किस तरह अफवाह इतनी तेजी से भीड़ के बीच फैली और भगदड़ की स्थिति कैसे बनी। घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और रेलवे हॉल्ट के आसपास की व्यवस्था की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और बिना पुष्टि के कोई सूचना आगे न फैलाएं। भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर विशेष सावधानी बरतने की भी अपील की गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जताया दुख
लखीसराय के अशोकधाम में हुए हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मृतक श्रद्धालुओं के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोकधाम की घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर से वह व्यथित हैं। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने की बात कही।मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
अफवाह बनी सबसे बड़ी वजह
इस पूरे हादसे में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि करंट लगने की अफवाह ने श्रद्धालुओं के बीच अचानक दहशत पैदा कर दी, जबकि प्रशासन के मुताबिक उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी। भीड़ में कुछ लोगों के अचानक भागने से स्थिति बिगड़ती चली गई और देखते ही देखते भगदड़ मच गई।
धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के दौरान अफवाह कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, अशोकधाम की घटना इसका दर्दनाक उदाहरण है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और घटना की पूरी सच्चाई सामने लाना है।
हादसे के बाद अशोकधाम और आसपास के इलाके में मातम का माहौल है। जिन परिवारों ने सावन की सोमवारी पर भगवान शिव के दर्शन के लिए अपने परिजनों को मंदिर भेजा था, उनके लिए यह दिन कभी न भूलने वाला दुख बन गया है। प्रशासन द्वारा मृतकों और घायलों से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है तथा जांच के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का स्पष्ट पता चल सकेगा।