लखीसराय: अशोकधाम मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद मृतकों के परिजनों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। सावन की तीसरी सोमवारी पर मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ के बीच हुए हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अपनों को खोने का दर्द झेल रहे परिजन अब प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर मौके पर भीड़ नियंत्रण, बिजली और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम बेहतर होते तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता।

हादसे के बाद अशोकधाम परिसर से लेकर सदर अस्पताल तक अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में घायल लोगों को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, मृतकों के परिजन अपनों की तलाश में अस्पताल पहुंचते रहे। अस्पताल परिसर में अपने परिवार के सदस्य की पहचान और इलाज को लेकर लोगों की बेचैनी साफ नजर आई।


व्यवस्था को लेकर परिजनों में गुस्सा

मृतकों के परिजनों का आरोप है कि सावन की सोमवारी को मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना पहले से थी। इसके बावजूद भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। परिजन यह सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी भीड़ के बीच सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं कराया गया।

परिजनों का कहना है कि मंदिर परिसर और आसपास बिजली से जुड़े इंतजामों की भी पर्याप्त जांच होनी चाहिए थी। हादसे के बाद अब लोग पूरे घटनाक्रम की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल हादसे के बाद राहत और बचाव की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें लापरवाही कहां हुई।


सदर अस्पताल में भी व्यवस्था पर सवाल

हादसे के बाद घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल लाया गया। यहां भी मरीजों और उनके परिजनों को इलाज और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिजन बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की मांग करते नजर आए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद अस्पताल में बड़ी संख्या में घायल पहुंच सकते हैं, ऐसे में पहले से अतिरिक्त डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, दवाएं और जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध होने चाहिए थे।


परिजनों के आक्रोश का एक बड़ा कारण यह भी है कि हादसे में घायल कई लोगों को तत्काल और बेहतर इलाज की जरूरत थी। ऐसे में अस्पताल की क्षमता और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों की मांग है कि घायलों के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पतालों में तत्काल रेफर किया जाए।


अपनों को खोने का दर्द, जवाब मांग रहे परिवार

अशोकधाम हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। जिन लोगों के परिवार के सदस्य इस हादसे में जान गंवा चुके हैं, उनके लिए यह समय बेहद मुश्किल है। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कोई अपने पिता को खोज रहा है तो कोई अपने परिवार के दूसरे सदस्य की जानकारी लेने के लिए परेशान है।

परिजनों का कहना है कि हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही मंदिर और आसपास के इलाकों में भविष्य में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की मांग भी उठ रही है।

हादसे के बाद कई सवाल अनुत्तरित

अशोकधाम हादसे ने प्रशासनिक तैयारियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारी भीड़ वाले धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त तैयारी थी? बिजली व्यवस्था की निगरानी कैसे हुई? भीड़ नियंत्रण के लिए कितने सुरक्षाकर्मी और अधिकारी तैनात थे? हादसे के बाद घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या आपातकालीन प्लान तैयार था?


इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल मृतकों के परिजन मुआवजे के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने और व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। हादसे ने यह साफ कर दिया है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में सिर्फ भीड़ जुटने की व्यवस्था नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा के लिए मजबूत और पहले से तैयार आपातकालीन तंत्र जरूरी है।