लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी के मौके पर सोमवार सुबह अचानक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान बिजली का तार या पोल गिरने और करंट आने की अफवाह फैल गई। देखते ही देखते श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोगों के घायल होने की सूचना है।

घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में चीख-पुकार मच गई। प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। हादसे के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

बिजली का करंट लगने की बात को बताया अफवाह

घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेजी से फैल गई कि मंदिर के पास बिजली का तार या पोल गिर गया था और उसमें करंट आने की वजह से श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। हालांकि, स्थानीय स्तर से सामने आई जानकारी के मुताबिक हादसे की मुख्य वजह करंट लगना नहीं, बल्कि अफवाह के बाद मची भगदड़ बताई जा रही है।

स्थानीय विधायक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने सुबह करीब पांच बजे वीडियो कॉल के जरिए अशोक धाम के पास राहत शिविर में मौजूद अपने कार्यकर्ताओं से घटना की जानकारी ली थी। उस समय तक स्थिति सामान्य थी और किसी तरह की समस्या की सूचना नहीं थी।

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि घटना के बाद यह अफवाह फैलाई गई कि बिजली के करंट से लोगों की मौत हुई है, जबकि ऐसी स्थिति नहीं थी। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं के बीच अचानक फैली अफवाह के कारण भगदड़ मची और इसी दौरान लोगों की जान गई।

अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यह भी कहा कि भगदड़ के दौरान अफवाह फैलाने वाले लोगों को चिन्हित किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि जांच के बाद ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने गलत सूचना फैलाकर श्रद्धालुओं के बीच भय और अफरा-तफरी का माहौल पैदा किया।

अशोक धाम में सावन की सोमवारी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। तीसरी सोमवारी होने के कारण इस बार भी सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में काफी भीड़ थी। इसी भीड़ के बीच अचानक अफवाह फैलने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जताया दुख

हादसे पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने इस दुखद घटना पर शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। हादसे के बाद प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और घायलों के उपचार तथा प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

जांच के बाद साफ होगी हादसे की पूरी तस्वीर

अशोक धाम हादसे को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अफवाह किसने और किस परिस्थिति में फैलाई। प्रशासनिक जांच में इस बात की भी पड़ताल की जा सकती है कि भगदड़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या किसी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी।

फिलहाल हादसे के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन का फोकस घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने, मृतकों के परिजनों को सहायता पहुंचाने और घटना की वास्तविक वजह सामने लाने पर है।

सावन की सोमवारी पर आस्था के केंद्र अशोक धाम में हुआ यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ के बीच अफवाहों को रोकने और आपात स्थिति से निपटने के लिए कितनी मजबूत व्यवस्था जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।