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24-Sep-2025 11:22 AM
By First Bihar
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ है, लेकिन राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सभी दल अपनी-अपनी रणनीति और जनसंपर्क अभियान में जुट गए हैं। इसी कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल न्याय यात्रा की शुरुआत कर चुनावी जंग का शंखनाद कर दिया है। बुधवार को किशनगंज पहुंचे ओवैसी ने प्रेस वार्ता कर महागठबंधन और विपक्षी दलों पर तीखे हमले किए।
ओवैसी ने खुद की पार्टी को महागठबंधन में शामिल न किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर साफ कहा कि बिहार की जनता सब देख रही है कि आखिर भाजपा की ‘बी टीम’ कौन है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पत्र लिखा था। साथ ही मीडिया के माध्यम से भी गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई गई थी। AIMIM की ओर से केवल छह सीटों की मांग रखी गई थी, लेकिन तेजस्वी यादव की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
ओवैसी ने कहा, “हमने अपनी जिम्मेदारी निभा दी है। अब यह बिहार की जनता तय करेगी कि कौन भाजपा को मजबूत करना चाहता है और कौन वास्तव में उसके खिलाफ खड़ा है।” हालांकि सीटों की संख्या और गठबंधन की संभावनाओं पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया और इतना ही कहा कि “लिस्ट जारी होने पर सब कुछ साफ हो जाएगा।”
पत्रकारों ने जब उनसे ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद को लेकर सवाल किया तो ओवैसी ने दो टूक कहा कि हर मुसलमान पैगंबर मोहम्मद से मोहब्बत करता है और यह उनके ईमान का हिस्सा है। ऐसे पोस्टरों पर रोक लगाने की बात पूरी तरह गलत है और इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। इसके अलावा तेजस्वी यादव द्वारा डिग्री धारकों को रोजगार देने के वादे पर भी ओवैसी ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि बिहार में स्नातक पास कितने युवा हैं। महज खोखले वादों से जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता।
ओवैसी की सीमांचल यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि AIMIM इस बार बिहार चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी में है। किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जैसे सीमांचल जिलों में पार्टी का मजबूत जनाधार माना जाता है। पिछली बार भी AIMIM ने इसी क्षेत्र से कुछ सीटें जीतकर सबको चौंकाया था। अब ओवैसी की सक्रियता से यहां का चुनावी मुकाबला और रोचक होने वाला है।
इधर, ओवैसी की प्रेस वार्ता और सीमांचल न्याय यात्रा न सिर्फ AIMIM के आत्मविश्वास को दिखाती है बल्कि यह भी संकेत देती है कि आने वाले चुनाव में महागठबंधन को मुस्लिम वोट बैंक पर एकतरफा भरोसा करना अब आसान नहीं होगा। AIMIM की दावेदारी महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।