EOU raid Bihar : किशनगंज में आय से अधिक संपत्ति के बहुचर्चित मामले ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार से जुड़ी जांच के बीच शनिवार रात सामने आई एक संदिग्ध घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। देर रात एसडीपीओ कार्यालय परिसर में एक लाल रंग की थार गाड़ी के अचानक पहुंचने और उसमें सवार लोगों के भीतर जाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


देर रात ‘रहस्यमयी एंट्री’ से मचा हड़कंप

घटना शनिवार रात की है, जब अनुमंडल कार्यालय परिसर स्थित एसडीपीओ कार्यालय में बीआर 11 बीबी 7973 नंबर की लाल थार दाखिल हुई। गाड़ी में सवार तीन लोग बिना किसी औपचारिक अनुमति के सीधे कार्यालय के अंदर चले गए। बताया जाता है कि वे करीब 15 मिनट तक अंदर रहे और फिर बाहर निकलने लगे।


रात के समय इस तरह की गतिविधि ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क कर दिया। जैसे ही गाड़ी बाहर निकलने लगी, ड्यूटी पर मौजूद जवानों ने संदेह के आधार पर वाहन को रोक लिया। पूछताछ में उनकी पहचान मोहम्मद हबीब (किशनगंज), सौदागर (पूर्णिया, चालक) और एक नाबालिग के रूप में हुई।


‘AC खोलने’ की दलील, लेकिन सवाल बरकरार

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मुख्यालय सह प्रभारी एसडीपीओ मंगलेश कुमार और सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। तीनों को हिरासत में लेकर थार गाड़ी समेत थाना लाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि वे कार्यालय में एसी खोलने गए थे। हालांकि, पुलिस इस दलील को पूरी तरह से स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही है। अधिकारियों का मानना है कि रात के समय बिना अनुमति सरकारी कार्यालय में प्रवेश और फिर जल्दबाजी में निकलना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है।


क्या दस्तावेज हटाने की थी कोशिश?

सूत्रों के मुताबिक, यह आशंका जताई जा रही है कि कार्यालय से किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज या सामान को हटाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। लेकिन जिस समय यह घटना हुई, वह खुद में संदेह पैदा करने के लिए काफी है। यही कारण है कि पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम को पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले के संदर्भ में भी देख रही है।


100 करोड़ की संपत्ति का दावा, कई शहरों में जाल

दरअसल, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) पहले से ही गौतम कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की जांच कर रही है। 29 मार्च को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद 31 मार्च को किशनगंज, पूर्णिया समेत छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।


जांच एजेंसियों का दावा है कि महज 32 साल की सेवा अवधि में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की गई है। यह संपत्ति कई शहरों में फैली हुई बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े सुराग भी मिले थे।


गाड़ियों की खरीद-बिक्री पर भी जांच

EOU की टीम ने हाल ही में दोबारा किशनगंज पहुंचकर गाड़ियों की खरीद-बिक्री के स्रोतों की भी जांच शुरू की है। इसी कड़ी में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं संदिग्ध थार गाड़ी का संबंध भी इसी नेटवर्क से तो नहीं है।हालांकि अभी तक इस गाड़ी और गौतम कुमार के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही हैं।


पुलिस का आधिकारिक बयान

किशनगंज के एसपी संतोष कुमार ने इस पूरे मामले पर कहा कि फिलहाल तीनों लोगों से पूछताछ जारी है। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने एसी खोलने की बात कही है, लेकिन पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


बढ़ती जा रही है सस्पेंस

इस पूरी घटना ने पहले से चल रही जांच को और ज्यादा रहस्यमय बना दिया है। एक ओर जहां आय से अधिक संपत्ति का मामला पहले ही सुर्खियों में है, वहीं अब देर रात कार्यालय में संदिग्ध प्रवेश की घटना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।क्या यह महज एक संयोग था या फिर किसी बड़े सबूत को मिटाने की कोशिश? क्या इस घटना का सीधा संबंध गौतम कुमार से है? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस और EOU की जांच पर टिकी हुई है।फिलहाल इतना तय है कि किशनगंज का यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है, और हर नई कड़ी इस रहस्य को और गहरा करती जा रही है।