Bihar Crime News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी है, लेकिन पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. तस्कर कभी कार तो कभी टेंपो और दूसरे वाहनों में शराब छिपाकर बिहार पहुंचाने की कोशिश करते हैं. अब इस तस्करी में महिलाओं की भूमिका भी सामने आ रही है. किशनगंज में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने टेंपो में छिपाकर लाई जा रही 106 लीटर से ज्यादा विदेशी शराब बरामद की है. मामले में एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
किशनगंज एसपी संतोष कुमार के निर्देश पर जिले में अवैध शराब और मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत ठाकुरगंज पुलिस को यह सफलता मिली है. पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान बंगाल की ओर से आ रहे एक टेंपो को रोका, जिसमें गुप्त तरीके से शराब की बड़ी खेप छिपाकर लाई जा रही थी.
बस स्टैंड मोड़ के पास पकड़े गए दोनों
ठाकुरगंज पुलिस की टीम बस स्टैंड मोड़ के पास वाहनों की जांच कर रही थी. इसी दौरान बंगाल की ओर से एक टेंपो वहां पहुंचा. टेंपो में चालक के साथ एक महिला भी बैठी थी. पुलिस बल को देखते ही दोनों टेंपो से उतरकर भागने की कोशिश करने लगे.
पुलिस को शक होने पर दोनों को रोककर पूछताछ की गई. इसके बाद टेंपो की तलाशी ली गई तो उसमें छिपाकर रखा गया एक बड़ा बैग मिला. बैग खोलकर देखा गया तो उसमें अलग-अलग ब्रांड की विदेशी शराब रखी हुई थी.
106.25 लीटर विदेशी शराब बरामद
पुलिस ने टेंपो से कुल 106.25 लीटर विदेशी शराब बरामद की है. बरामद शराब की बाजार में अनुमानित कीमत करीब डेढ़ से दो लाख रुपये बताई जा रही है. पुलिस ने शराब के साथ टेंपो को भी जब्त कर लिया है.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अपसार आलम, 33 वर्ष, पिता समसूल आलम, निवासी माखन पोखर, थाना पोठिया और अनीता देवी, 40 वर्ष, पति दीपक बंजारा, निवासी जुराबगंज, थाना कोढ़ा, जिला कटिहार के रूप में हुई है.
मामले में ठाकुरगंज थाना कांड संख्या 286/2026 दर्ज किया गया है. पुलिस ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2022 की धारा 30(ए) के तहत कार्रवाई शुरू की है. पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों को मंगलवार को जेल भेज दिया गया.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की खेप बंगाल में कहां से लाई गई थी और इसे किशनगंज के रास्ते बिहार में किस जगह पहुंचाया जाना था. पुलिस शराब तस्करी के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की भी जांच कर रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके.