Holi AI Photo Editing: अब घर बैठे बनाएं शानदार होली फोटो, हर कोई पूछेगा कहां कराया फोटोशूट? PM Kisan का बड़ा फायदा! सालाना ₹6,000 के साथ मिलेगी ₹36,000 की पेंशन, जानिए सरकार का डबल बेनिफिट प्लान बिहार में नशे के खिलाफ बड़ा धमाका! अब हर जिले में खुलेगा खास नारकोटिक्स थाना बिहार में होली की धूम: तेजप्रताप यादव ने खेली कुर्ता फाड़ होली, रामकृपाल यादव ने लगाए ठुमके नीतीश के शराबबंदी दावे पर सवाल: कटिहार में खुलेआम धधक रही महुआ की अवैध भट्ठियां चिराग पासवान की शादी का इंतजार: होली पर मां ने कहा..घर में बहू जल्द आने की उम्मीद शादी के बाद रश्मिका-विजय का स्पेशल गिफ्ट, ‘मीट एंड ग्रीट’ में फैंस को अपने हाथों से परोसा खाना शादी के बाद रश्मिका-विजय का स्पेशल गिफ्ट, ‘मीट एंड ग्रीट’ में फैंस को अपने हाथों से परोसा खाना PMCH के 35 जूनियर डॉक्टरों पर क्यों हुआ केस? मंत्री के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज PMCH के 35 जूनियर डॉक्टरों पर क्यों हुआ केस? मंत्री के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज
04-Mar-2026 02:51 PM
By First Bihar
KATIHAR: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1 अप्रैल 2016 को प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जिसका उद्धेश्य समाज को नशामुक्त करना था, लेकिन यह कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया। कटिहार जिले की यह तस्वीर इस कानून के सच को बयां करने के लिए काफी है।
आजमनगर थाना क्षेत्र में इस कानून का सरेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। शराबबंदी के 9 साल बाद भी बंगाल सीमा से सटे गांवों में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। यह तस्वीर देवगांव पंचायत के वाजितपुर गांव का है, जहां धधकती भट्ठियों पर महुआ शराब तैयार की जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो अवैध शराब को घर-घर तक पहुँचाती हैं। आजमनगर थाना क्षेत्र की कुछ प्रमुख पंचायतें अरिहापुर, बघौरा, जोकड़, खरसौता, शीतलपुर और शितलमनीजहां यह अवैध धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस केवल राह चलते शराबियों को पकड़ती है लेकिन चल रहे अवैध शराब निर्माण के भट्ठे को ध्वस्त करने की कोशिश नहीं करती। धधकती भट्ठियों के बीच पुलिस का अनजान बने रहना शराबबंदी कानून की साख पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अगर समय रहते सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर ठोस कार्रवाई नहीं की गयी तो शराबबंदी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगी और इस कानून को लागू करने का उद्धेश्य फेल हो जाएगा। सरकार और पुलिस को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। यही कारण है कि लोग लगातार शराबबंदी पर सवाल उठा रहे है और शराबबंदी समीक्षा की मांग कर रहे हैं। सरकार में बने लोग भी यही मांग कर रहे हैं।
कटिहार से सोनू चौधरी की रिपोर्ट