KAIMUR: कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड स्थित नसेज गाँव में पिछले कई वर्षों से जलजमाव की समस्या लोगों के लिए अभिशाप बन गई है। 400 से अधिक परिवार गंदे पानी के बीच नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।


कुदरा प्रखंड का नसेज गाँव पिछले 7-8 वर्षों से भीषण जलजमाव की समस्या से जूझ रहा है। गाँव की मुख्य सड़कें और गलियाँ गंदे पानी से लबालब भरी हुई हैं, जिससे ग्रामीणों का आवागमन लगभग ठप हो गया है। हालत इतनी खराब है कि बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।


स्थानीय निवासी राम अवध सिंह और राम अवतार सिंह बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए तो उसे मुख्य सड़क तक पहुँचाने के लिए चारपाई या कंधे का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि गाँव के अंदर कोई वाहन प्रवेश नहीं कर पाता।


 ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से नाली निर्माण का काम कछुआ गति से चल रहा है और आज तक पूरा नहीं हो सका। आरोप है कि गाँव के पानी की निकासी के लिए उत्तर दिशा में स्थित सरकारी जमीन की ओर रास्ता बनाने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर पहले भी जिलाधिकारी और पंचायती राज पदाधिकारी को लिखित आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।


इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए मोहनिया एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी ने कहा कि कुदरा प्रखंड के नसेज गाँव में नाली निर्माण और जलजमाव की समस्या का मामला हमारे संज्ञान में आया है। वीडियो से मिली जानकारी के मुताबिक नाली का कुछ काम हुआ है, लेकिन जलजमाव की स्थिति को देखते हुए एक विशेष जांच टीम का गठन किया जा रहा है। हमारी पहली प्राथमिकता जलजमाव को खत्म करना है ताकि कोई महामारी न फैले। इस लापरवाही पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


सबसे चिंताजनक बात यह है कि गाँव में स्कूल और कॉलेज होने के बावजूद बच्चे नियमित पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिक्षक भी जलजमाव देखकर वापस लौट जाते हैं। अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।