Bihar News: देश की सरहद की हिफाजत करते हुए सिकंदरा प्रखंड के खरडीह गांव के जवान मनीर अंसारी ने अपनी जान गंवा दी। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में स्टोर कीपर के पद पर लेह-लद्दाख में तैनात मनीर अंसारी ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में बलिदान हो गए। शनिवार की देर रात जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव खरडीह पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। परिजनों की चीख-पुकार और ग्रामीणों की नम आंखों ने माहौल को बेहद गमगीन कर दिया।



रविवार की सुबह नमाज के बाद करीब साढ़े आठ बजे सिकंदरा पुलिस ने मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस निरीक्षक स्वयं प्रभा, थानाध्यक्ष विकास कुमार सहित पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जवानों ने सम्मानपूर्वक सलामी देकर देश की सेवा में दिए गए उनके योगदान को नमन किया। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार उन्हें कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।



परिजनों के अनुसार मनीर अंसारी वर्ष 2000 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह GREF में स्टोर कीपर के रूप में लेह-लद्दाख में तैनात थे। उनके चचेरे भाई मु. जावेद ने बताया कि 3 सितंबर की शाम मनीर की पत्नी फरहीन सदफ के मोबाइल पर सेना के एक सूबेदार का फोन आया। उन्हें बताया गया कि ड्यूटी के दौरान मनीर हादसे का शिकार हो गए हैं और उनका इलाज आर्मी अस्पताल में चल रहा है।



बताया गया कि ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन को फट्टे की मदद से वाहन से उतारा जा रहा था। इसी दौरान फट्टा अचानक खिसक गया और मशीन अनियंत्रित होकर पलट गई। मशीन मनीर के पैर पर जा गिरी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें तत्काल आर्मी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने ऑपरेशन शुरू किया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद मनीर स्वस्थ होकर वापस घर लौट आएंगे। लेकिन अगले दिन सुबह आया फोन परिवार की सारी उम्मीदें तोड़ गया।



4 सितंबर की सुबह सेना के सूबेदार ने परिवार को मनीर की मौत की सूचना दी। परिजनों के मुताबिक उपचार के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही पत्नी फरहीन सदफ बेसुध हो गईं। 19 वर्षीय बेटी आलिया परवीन और 15 वर्षीय बेटे मोहम्मद अरसलान अंसारी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मनीर के बलिदान की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे। हर कोई परिवार को ढांढस बंधा रहा था, लेकिन किसी के पास परिजनों के इस असहनीय दुख को कम करने के लिए शब्द नहीं थे।



रविवार की सुबह मनीर अंसारी के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के लिए ले जाया गया तो सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और पुलिस पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। पुलिस जवानों की सलामी और लोगों की नम आंखों के बीच मनीर अंसारी को अंतिम विदाई दी गई।



मनीर अंसारी ने वर्ष 2000 में सेवा शुरू की थी और करीब 26 वर्षों तक देश की सेवा की। लेह-लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में ड्यूटी निभाते हुए उनका जीवन समाप्त हो गया। परिवार ने अपना सहारा खो दिया, वहीं खरडीह गांव ने देश सेवा में समर्पित अपना एक बेटा खो दिया। अंतिम विदाई के दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि मनीर अंसारी का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनके देश के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को ग्रामीणों ने नमन किया। पूरे गांव में देर तक मातम पसरा रहा और हर आंख नम दिखाई दी।