JAMUI: जमुई में एक बार फिर रेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए हैं। ट्रेन से कटकर एक महिला की मौत के बाद शव को सम्मानजनक तरीके से घटनास्थल से हटाने की व्यवस्था तक नहीं हो सकी। हालात ऐसे रहे कि शव को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ और परिजनों को बोरे में बांधकर शव को घटनास्थल से ले जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि मलयपुर निवासी अशोक सिंह की 50 वर्षीय पत्नी अंजू देवी शनिवार के देर शाम से घर नहीं आई थी। अंजू देवी के दोनों बेटे और पति गोवा में मजदूरी करते हैं। अंजू देवी अपनी बहू और सास के साथ मलयपुर में रहती है।
आज ट्रेन की चपेट में आने से उनकी दर्दनाक मौत हो गयी। शव रेलवे ट्रैक पर काफी देर तक पड़ा रहा। वहां से जीआरपी कार्यालय की दूरी महज 100 मीटर है, लेकिन शव तक पहुंचने में जीआरपी की टीम को 11 घंटे का समय लग गया। यह बड़ा सवाल है कि इतनी देरी क्यों हुई? देरी के बावजूद शव को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पाया।
घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद रेलवे की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल पर मौजूद जीआरपी और रेलवे कर्मियों ने शव को उठाने में मदद नहीं की। लिहाजा परिजनों को खुद शव को रेलवे से आए डोम के साथ मिलकर बोरे में बांधकर मलयपुर रेलवे फाटक के पास खड़े टेंपो तक ले जाना पड़ा।
मृतका के भाई सतीश कुमार सिंह ने बताया कि जीआरपी की ओर से ना तो स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि परिजनों ने खुद शव को उठाकर मलयपुर रेलवे फाटक के पास खड़े टेंपो तक पहुंचाया। टेंपो की व्यवस्था भी परिजनों ने ही की। इसके बाद पुलिस उनके साथ सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए जा रही थी।
उन्होंने बताया कि जीआरपी की लापरवाही के कारण महिला के सब को घंटे ट्रैक पर ही छोड़ दिया गया इस दौरान कौवा सबको नोचते रहा जिससे आक्रोशित और बेबस परिजनों को खुद घंटे तक रेलवे पटरी पर ही बैठकर सब की रखवाली करनी पड़ी वह सुबह से अपनी मृत बहन के शव के पास बैठकर उसकी देखभाल कर रहे थे। उनके अनुसार, शव को कौवे या कुत्ते नुकसान न पहुंचाएं, इसलिए वह लगातार शव के पास बैठे रहे। उनका आरोप है कि घटनास्थल पर जीआरपी और जिम्मेदार अधिकारी मौजूद होने के बावजूद शव के पास जाने के बजाय काफी दूर मलयपुर रेलवे फाटक के पास खड़े रहे। सतीश ने बताया कि इस दौरान काफी संख्या में कौवे शव को नोच रहे थे, लेकिन जीआरपी के जवान वहां खड़े होकर देखते रहे।
वहीं मृत महिला के बड़े भाई संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें मलयपुर से फोन आया था कि उनकी बहन कल शाम से घर से निकली है और वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिजनों ने रात में काफी देर तक चारों तरफ खोजबीन की, लेकिन कोई पता नहीं चला। कुछ लोगों ने रात में बताया कि रेलवे ट्रैक पर एक महिला ट्रेन की चपेट में आ गई है। रात में अंधेरा होने के कारण शव की पहचान नहीं हो सकी। सुबह उजाला होने पर साड़ी देखकर परिजनों ने पहचान की कि शव उनकी बहन का ही है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात में ही स्टेशन और गेटमैन के माध्यम से घटना की सूचना दे दी गई थी। लिहाजा सवाल उठ रहा है कि जब रात में ही सूचना दे दी गई थी तो शव को हटाने में इतनी देर क्यों हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटनास्थल पर पहुंचे दरोगा भी शव के पास नहीं गए। वहां मौजूद जीआरपी कर्मी मोबाइल में तस्वीर देखकर ही स्थिति का अनुमान लगाते रहे और डायरी लिखते रहे, जबकि कुछ ही दूरी पर शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा था।
स्टेशन मास्टर के अनुसार, रविवार सुबह करीब 5:35 बजे घटना की जानकारी मिली। इसके बाद 5:45 बजे जीआरपी को सूचना दी गई। वहीं पूरे मामले को लेकर जीआरपी एएसआई सुनील कुमार ने कहा कि उन्हें सुबह 5:45 बजे घटना की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद वे मौके पर पहुंचे और कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया।
जीआरपी थानाध्यक्ष श्रवण कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया महिला की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है और पुलिस घटना की जांच कर रही है। स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराने के सवाल पर थानाध्यक्ष ने कहा कि जीआरपी के पास स्ट्रेचर है, लेकिन तत्काल यह जानकारी नहीं है कि कितने स्ट्रेचर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की दूरी अधिक होने के कारण संभव है कि स्ट्रेचर किसी दूसरे स्थान पर गया हो।
बहरहाल, मौत के बाद शव को घटनास्थल से सम्मानजनक तरीके से हटाने के लिए स्ट्रेचर और एंबुलेंस जैसी बुनियादी व्यवस्था नहीं मिलने के आरोपों ने जमुई रेल प्रशासन की कार्यशैली और मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि डेढ़ माह पहले भाई बहन की मौत के बाद भी एस्टरेचर नसीब नहीं हुई थी और उससे भी बस बल्ले के सहारे तंग कर ले जाएंगे इसका भी वीडियो काफी तेजी से वायरल हुआ था हालांकि उसे मामले से भी रेल प्रशासन अब तक सीख नहीं ले पा रही है।