JAMUI: जमुई जिले के सोनो थाना क्षेत्र के सोनो चौक पर बुधवार की सुबह करीब 8 बजे स्कूल जा रही बच्चों से भरी एक पुरानी और खटारा वैन की बैटरी अचानक फट गई। हादसे में वैन में सवार छह बच्चे झुलस गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल बच्चों को वैन से बाहर निकाला और इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंचाया। इनमें दो बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि चार बच्चों को मामूली चोट लगी है।


घायल बच्चों की पहचान कक्षा दो के अंकित कुमार, पिता प्रमोद दास और कक्षा तीन के लवकुश कुमार, निवासी नीमाटीला क्षेत्र, के रूप में हुई है। दोनों बच्चों के पैर झुलसने की बात सामने आई है। अन्य चार बच्चों को मामूली चोटें आईं, जिसके बाद उनके परिजन उन्हें घर ले गए। सभी बच्चे सेंट जेवियर्स हाई स्कूल के बताए गए हैं।


क्षमता 12 बच्चों की, वैन में सवार थे करीब 22 बच्चे


बताया जा रहा है कि जिस वैन से बच्चों को स्कूल ले जाया जाता है, उसमें करीब 12 बच्चों के बैठने की क्षमता है, लेकिन हादसे के वक्त करीब 22 बच्चे सवार थे। यानी क्षमता से लगभग दोगुने बच्चे एक ही वैन में बैठाए गए थे। पुरानी खटारा वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल ले जाने की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है।


सीट के नीचे रखी बैटरी में हुआ धमाका


घायल अंकित कुमार ने बताया कि सीट के नीचे रखी बैटरी में अचानक धमाका हुआ, जिससे वह झुलस गया। अंकित की मां ने बताया कि उन्हें वैन में आग लगने की सूचना मिली थी। उन्होंने स्कूल प्रशासन से पुरानी गाड़ियों की जगह सुरक्षित और नई गाड़ियां चलाने की मांग की है।


घटना की सूचना मिलने पर सोनो थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिली है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।


स्कूल संचालक का बयान बना चर्चा का विषय


घटना के बाद स्कूल संचालक सुनील बरनवाल का बयान भी चर्चा में है। बच्चों के साथ हुई घटना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “बड़ी-बड़ी घटनाएं हो जाती हैं, यहां तक कि हवाई जहाज भी क्रैश कर जाते हैं।” उन्होंने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए रेडिएटर का पानी गर्म होने के बाद ढक्कन खुलने की बात कही।


स्कूल संचालक के इस बयान को लेकर लोगों में नाराजगी है। सवाल उठ रहा है कि क्या बच्चों के झुलसने की घटना को हवाई जहाज दुर्घटना का उदाहरण देकर सामान्य बताया जा सकता है? जब स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है तो वाहन की फिटनेस, उसकी तकनीकी स्थिति और उसमें बैठने वाले बच्चों की संख्या सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है।


एक ओर बच्चों को पुरानी खटारा वैन में क्षमता से अधिक बैठाकर स्कूल ले जाया जा रहा था, वहीं घटना के बाद संचालक का बयान भी संवेदनहीनता को दर्शाता नजर आ रहा है। बच्चों की जिंदगी के साथ यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?


लिहाजा, अब लोगों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले में स्कूल संचालक और वाहन व्यवस्था के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। साथ ही यह भी सवाल है कि जिले में बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाली अन्य वाहनों की फिटनेस और क्षमता की जांच कब होगी। वहीं पूरे मामले को लेकर एसडीएम सौरव सुमन ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है।