Bihar News: जमुई में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए बुधवार को जिला प्रशासन के अधिकारी स्कूलों में पहुंचे। निरीक्षण के दौरान डीएम ने महज कागजी जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कक्षा में शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों को पढ़ाया और उनके ज्ञान का स्तर परखा। इसके बाद बच्चों के साथ बैठकर मध्याह्न भोजन भी किया। डीएम के इस अंदाज से विद्यालयों में कुछ देर के लिए अलग माहौल देखने को मिला।



डीएम के निर्देश पर जिले के सभी वरीय अधिकारियों ने अलग-अलग विद्यालयों का निरीक्षण किया। इसी क्रम में डीएम ने बरहट प्रखंड के स्वर्गीय शुक्रदास यादव मेमोरियल राजकीय उच्च विद्यालय बरहट, आदर्श राजकीय बुनियादी विद्यालय बरहट तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय ललमटिया का जायजा लिया। उन्होंने विद्यालय में शिक्षकों एवं कर्मियों की उपस्थिति, बच्चों की उपस्थिति, पठन-पाठन की स्थिति, विद्यालय के अभिलेख और उपलब्ध संसाधनों की जांच की।



डीएम कक्षा में पहुंचे तो उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद शुरू किया। पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछकर यह जानने का प्रयास किया कि कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषयों को बच्चे कितना समझ पा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने स्वयं बच्चों को पढ़ाया और शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर देने को कहा।



निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की भी जांच की गई। भोजन की स्थिति जानने के लिए जिला पदाधिकारी ने खुद खाना निकालकर बच्चों के साथ बैठकर मध्याह्न भोजन किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और साफ-सफाई का जायजा लिया। साथ ही विद्यालय में शौचालय, बिजली, पेयजल समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी देखी।



बता दें कि हाल में हुई जिला समन्वय समिति की बैठक में जिला पदाधिकारी ने जिले के सभी वरीय अधिकारियों को एक-एक विद्यालय गोद लेने का निर्देश दिया था। इसी व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों द्वारा विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने आवंटित विद्यालयों में नियमित रूप से पहुंचकर शैक्षणिक व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की निगरानी करें।



जिला प्रशासन का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के बिना जिले के समग्र विकास की कल्पना संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना मजबूत करने के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को प्रतिदिन नियमित रूप से स्कूल भेजें। अधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा नियुक्त योग्य शिक्षकों की क्षमता का लाभ बच्चों को तभी मिलेगा, जब वे नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित रहेंगे।