Bihar News: जमुई के खैरा पंचायत के नवनिर्मित पंचायत सरकार भवन में निर्माण गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद निरीक्षण करने पहुंचे मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब पूरे बिहार में पंचायत सरकार भवनों के हस्तांतरण से पहले उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही निर्माणाधीन या पूर्ण हो चुके पंचायत सरकार भवनों को संबंधित पंचायत को हैंडओवर किया जाएगा। इससे निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के साथ भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि पंचायत सरकार भवन का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से किया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर जाली नहीं लगाए जाने के कारण समस्या सामने आने की बात बताई गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य की बारीकी से जांच करने और सामने आई कमियों को दूर कराने का निर्देश दिया।
जमुई में निरीक्षण के दौरान मंत्री ने भवन की छत की ढलाई के बाद किए गए प्लास्टर के कार्य का भी जायजा लिया। कई स्थानों पर प्लास्टर टूटे मिले, जिसे देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और तत्काल उसे दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भवन केवल बाहर से सुंदर दिखे, यह पर्याप्त नहीं है। निर्माण की मजबूती और गुणवत्ता भी उतनी ही जरूरी है।
मंत्री ने भवन के लाइब्रेरी रूम में लगे बिजली बोर्ड की स्थिति का भी निरीक्षण किया। बिजली बोर्ड के खुले या खराब स्थिति में होने को लेकर उन्होंने अधिकारियों को उसे ठीक कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि खुले में या खराब स्थिति में लगा बिजली बोर्ड किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है। इसलिए पंचायत सरकार भवनों में सुंदरता के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखना होगा।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने पंचायत सरकार भवन परिसर में पौधारोपण भी किया। इसके बाद उन्होंने खैरा पंचायत के वार्ड संख्या 11 का भी निरीक्षण किया और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की जानकारी ली। मौके पर पंचायती राज पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
गौरतलब है कि करीब 2 करोड़ 30 लाख रुपए की लागत से बने खैरा पंचायत सरकार भवन के हस्तांतरण के दौरान दीवारों में कई जगह दरारें, टूटे प्लास्टर और अन्य क्षतिग्रस्त हिस्से सामने आए थे। इसे लेकर स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
मंत्री के निरीक्षण से पहले भवन में रंग-रोगन कर उसे चमकाया गया था। इसके बाद मंत्री ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता और कमियों का जायजा लिया। अब पूरे बिहार में हैंडओवर से पहले पंचायत सरकार भवनों की जांच के निर्देश को इस मामले का बड़ा असर माना जा रहा है।