Bihar teacher : जहानाबाद जिले में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा है और स्पष्ट कर दिया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई तय है। इस घटनाक्रम से न सिर्फ शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है, बल्कि पूरे जिले में भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, नंदेश कुमारी नामक शिक्षिका उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चरुई (मोदनगंज प्रखंड) में कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर लंबे समय से संदेह जताया जा रहा था। अब जब इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच शुरू हुई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी सरस्वती कुमारी ने बताया कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षिका से निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा समाप्ति के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में शिक्षिका के पति राजीव शर्मा की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जो मोदनगंज प्रखंड के प्रमुख पद पर हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव और पहुंच का इस्तेमाल करते हुए मूल चयन पैनल में बदलाव कराया। बताया जा रहा है कि नंदेश कुमारी के शैक्षणिक दस्तावेजों और अन्य प्रमाण पत्रों में कथित रूप से हेरफेर कर उन्हें नौकरी दिलाई गई। इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और दस्तावेजों की जालसाजी की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नंदेश कुमारी कई वर्षों से विद्यालय में कार्यरत हैं और नियमित रूप से वेतन भी ले रही हैं, जबकि उनकी नियुक्ति की वैधता शुरू से ही संदेह के घेरे में रही है। अब जब यह मामला उजागर हुआ है, तो ग्रामीणों में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है और वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभागीय अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं अन्य नियुक्तियों में भी इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हुई हैं।
गौरतलब है कि बिहार में शिक्षक नियुक्ति को लेकर पहले भी कई बार अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में यह ताजा मामला विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विभाग अब इस पूरे प्रकरण को एक उदाहरण के रूप में लेते हुए सख्त कार्रवाई की तैयारी में है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल सभी की नजरें विभागीय जांच और शिक्षिका के जवाब पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।