Bihar News: बिहार विधानसभा में बुधवार को पिछले छह वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल के संचालन और किसानों व पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान का मुद्दा उठा। बरौली से जदयू विधायक और सत्तारूढ़ दल के उप मुख्य सचेतक मंजीत कुमार सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
विधायक मंजीत कुमार सिंह ने सदन में कहा कि सासामुसा चीनी मिल के बंद होने से किसानों का करीब 45 करोड़ रुपये और पूर्व कर्मियों का लगभग 9.50 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा बैंक का भी करीब 60 करोड़ रुपये का कर्ज है।
उन्होंने बताया कि एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण) ने मिल के स्क्रैप की करीब 17.64 करोड़ रुपये में नीलामी की अनुमति दी है और स्क्रैप काटने का काम शुरू हो चुका है। मिल की परिसंपत्तियों की नीलामी को लेकर 12 अगस्त को सुनवाई होनी है।
विधायक ने सदन को जानकारी दी कि एक निवेशक कंपनी ने बैंक का बकाया चुकाकर मिल को दोबारा संचालित करने की इच्छा जताई है और इस संबंध में एनसीएलटी में हलफनामा भी दाखिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि स्क्रैप की बिक्री नहीं होती है तो अगले पेराई सत्र से मिल दोबारा शुरू हो सकती है।
मंजीत कुमार सिंह ने सरकार से मांग की कि परिसमापन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और किसानों व पूर्व कर्मचारियों का शत-प्रतिशत बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मिल के गोदाम से करीब 12 करोड़ रुपये की चीनी बिक्री के बाद भी किसानों को भुगतान नहीं मिल सका, क्योंकि एनसीएलटी के आदेश पर राशि बैंक को दे दी गई।
मामले पर जवाब देते हुए गन्ना उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य की सभी बंद चीनी मिलों को चालू करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि किसानों के करीब 43 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की स्वीकृति सरकार पहले ही दे चुकी है और इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है।