Bihar News: गोपालगंज में सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज के बाद एक मरीज की मौत का मामला सामने आया है. मृतक के परिजनों ने सरकारी डॉक्टर और निजी क्लीनिक संचालक डॉ. कैप्टन एस.के. झा पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है कि पैर की उंगली के ऑपरेशन के दौरान मरीज की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां से गंभीर स्थिति में मरीज को गोरखपुर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ. बाद में गोपालगंज सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
मृतक की पहचान कुचायकोट थाना क्षेत्र के मौजे सिरिसिया निवासी अनूप मिश्रा के रूप में हुई है. घटना के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
बाइक से गिरने के बाद पैर की उंगली में हुआ था फ्रैक्चर
परिजनों के अनुसार, अनूप मिश्रा कुछ दिन पहले बाइक से गिर गए थे. हादसे में उनके पैर की छोटी उंगली में फ्रैक्चर हो गया था. इसके बाद इलाज के लिए वे नगर थाना क्षेत्र में कमला राय कॉलेज के पास स्थित डॉ. कैप्टन एस.के. झा के निजी क्लीनिक पहुंचे थे. जांच के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी और 28 जुलाई को ऑपरेशन की तारीख तय की गई.
ऑपरेशन के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों का कहना है कि 28 जुलाई की रात करीब 10 बजे अनूप मिश्रा का ऑपरेशन शुरू किया गया. ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. परिजनों ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान गलत या अधिक डोज का इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी स्थिति खराब हुई.
हालांकि, इंजेक्शन या इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. इस संबंध में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
सदर अस्पताल में भर्ती कराने के बाद गोरखपुर रेफर
परिजनों के मुताबिक, मरीज की हालत बिगड़ने के बाद डॉ. कैप्टन एस.के. झा ने एंबुलेंस से अनूप मिश्रा को सदर अस्पताल में भर्ती कराया. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन और अन्य जरूरी उपकरण लगाए जाने के बाद डॉक्टर वहां से चले गए.
सदर अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर रेफर कर दिया. इसके बाद परिजन उसे गोरखपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे.
गोरखपुर में कई दिनों तक चला इलाज
परिजनों के अनुसार, गोरखपुर के निजी अस्पताल में अनूप मिश्रा का करीब तीन से चार दिनों तक इलाज चला. इलाज के दौरान भी उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति गंभीर बताते हुए सुधार की संभावना कम होने की बात कही और उन्हें घर ले जाने की सलाह दी.
इसके बाद परिजन अनूप मिश्रा को वापस गोपालगंज लेकर आए और मॉडल सदर अस्पताल में भर्ती कराया. यहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
निजी क्लीनिक में इलाज को लेकर उठे सवाल
मरीज की मौत के बाद परिजनों ने सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि अनूप मिश्रा की हालत ऑपरेशन के दौरान ही बिगड़ी थी और यदि उस समय उचित इलाज और निगरानी होती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी.
परिजनों ने पूरे मामले की जांच कराने, डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज की प्रक्रिया की जांच करने और यदि किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही सामने आती है तो दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
इस मामले में लगाए गए आरोप फिलहाल मृतक के परिजनों की ओर से हैं. डॉ. कैप्टन एस.के. झा का पक्ष अभी सामने नहीं आया है. प्रशासन की ओर से भी मामले में जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इलाज के दौरान किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही हुई थी या नहीं.