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बिहार में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा एक और पुल? ढलाई के दौरान भरभराकर गिरा ढांचा, बाल-बाल बचे मजदूर

गोपालगंज में घोघारी नदी पर बन रहा करोड़ों रुपये का पुल अचानक ढह गया। ढलाई के दौरान गिरी इस संरचना ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस लापरवाही से हुआ यह बड़ा हादसा?

02-Mar-2026 05:05 PM

By First Bihar

Bihar News: बिहार के गोपालगंज जिले में निर्माणाधीन पुल के अचानक ढह जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव में घोघारी नदी पर बन रहा आरसीसी पुल ढलाई के दौरान ही भरभराकर गिर पड़ा। राहत की बात यह रही कि मौके पर मौजूद सभी मजदूर समय रहते सुरक्षित स्थान पर हट गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।


करीब 29 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण लगभग 2 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा था। पुल के तैयार होने पर आसपास के कई गांवों को सीधा संपर्क मार्ग मिलना था। खासकर बरसात के मौसम में लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, इसलिए ग्रामीण लंबे समय से इस पुल के निर्माण का इंतजार कर रहे थे।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 फरवरी को पुल के पहले स्पैन की ढलाई पूरी हो चुकी थी। 28 फरवरी को दूसरे स्पैन का काम चल रहा था। निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में था कि अचानक तेज आवाज के साथ स्लैब का एक हिस्सा धंस गया। देखते ही देखते अर्धनिर्मित ढांचा नीचे गिर पड़ा। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मजदूर जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।


घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरिया और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी। लोगों का यह भी कहना है कि यदि पुल के पूरी तरह बन जाने के बाद यह हादसा होता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।


घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंची। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने स्वयं स्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि सेटिंग के दौरान जंग लगे पाइपों का उपयोग किया गया था, जिससे संरचना की मजबूती प्रभावित हुई। डीएम ने तकनीकी लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया है।


प्रशासन ने संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। साथ ही, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।


इस घटना ने विकास कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सार्वजनिक धन से निर्माण कार्य किए जाते हैं, तो उनकी मजबूती और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।