Bihar Cabinet Meeting:पटना स्थित मुख्य सचिवालय में आयोजित बिहार कैबिनेट की बैठक में बुधवार को कुल 13 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में गया जिले में औद्योगिक विकास और जल आपूर्ति से जुड़े बड़े फैसले लिए गए। कैबिनेट ने अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत गया के डोभी क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) के लिए जलाशय निर्माण और जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना को मंजूरी दी है।


भारत सरकार पूर्वी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के साथ अमृतसर कोलकाता इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य 1839 किलोमीटर की लम्बाई में छः राज्यों में क्षेत्र के आर्थिक एवं रोजगार क्षमता का आकलन करना है। विशेष रूप से विनिर्माण, कृषि संस्करण, सेवाओं और निर्यातोन्मुख इकाईयों में निवेश को प्रोत्साहित करना तथा समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, वर्तमान आर्थिक एवं रोजगार क्षमता को विकसित करना है।


आई०एम०सी०, गयाजी के लिए पानी की उपलब्धता का आकलन एन०आई०सी०डी०सी० के द्वारा भूमि पर प्रस्तावित उद्योगों के प्रकार एवं प्रारभिक मास्टर प्लान के आधार पर किया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार 8.5 एम०एल०डी० (मिलियन लीटर/दिन) एवं अल्टीमेटेड डिमांड 19.00 एम०एल०डी० है। अल्टीमेटेड डिमांड के अनुसार प्रति वर्ष लगभग 8.5 एम०सी०एम० (मिलियन घन मीटर) पानी की आवश्कता है। आई०एम०सी०, डोभी (गयाजी) फेज-02 के तहत बियाडा द्वारा अधिग्रहण की जाने वाली 1300 एकड़ भूमि में से प्लॉट नं०-174 एवं 175 के सन्निकट जल संसाधन विभाग को जलाशय निर्माण हेतु आवश्यक भूमि उपलब्ध कराया जा रहा है।


उक्त स्थल पर 19 एम०एल०डी० जल उपलब्धता हेतु 8.5 एम०सी०एम० भंडारण क्षमता का जलाशय निर्माण के लिए क्षेत्रीय अभियंता द्वारा आवश्यक लगभग 324 एकड़ भूमि हेतु बियाडा, पटना को संसूचित किया गया है। लीलाजन नदी वर्षा आधारित नदी है, जिसमें मॉनसून के दरम्यान ही पानी प्रवाहित होती है। घोड़ाघाट के समीप लीलाजन नदी के बायीं ओर से लीलाजन सिंचाई योजना निःसृत है। लीलाजन मुख्य नहर एक अर्देन नहर है, जिसे लाईनिंग कर इसके रूपांकित जलश्राव 18 क्यूमेक को आवश्यकतानुसार 2.5 क्यूमेक तक बढ़ाया जा सकता है, जो कि नदी से 40 दिनों तक जल लेने से 8.5 एम०सी०एम० क्षमता के जलाशय में एक वर्ष के लिए पानी संचय किया जाना है। योजना को 18 माह में पूर्ण करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से गया और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।