GAYAJEE: पितृपक्ष मेले के दौरान मोक्ष की नगरी गयाजी में मंगलवार को एक खास धार्मिक तस्वीर देखने को मिली। शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे विष्णुपद मंदिर पहुंचीं और अपने ससुर बालासाहेब ठाकरे एवं पिता मधुकर चित्रे के निमित्त विधि-विधान से पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया। कर्मकांड के बाद उन्होंने कहा कि गयाजी आकर पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
आचार्य के साथ विष्णुपद मंदिर पहुंचीं स्मिता ठाकरे
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में स्मिता ठाकरे भी अपने आचार्य के साथ सोमवार को बोधगया पहुंची थीं। मंगलवार सुबह वह विष्णुपद मंदिर परिसर पहुंचीं और धार्मिक परंपरा के अनुसार पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की।
विष्णुपद मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तर्पण, पूजा और श्राद्ध कर्म संपन्न कराया गया। इस दौरान उन्होंने अपने ससुर बालासाहेब ठाकरे और पिता मधुकर चित्रे को याद करते हुए पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित की।
स्मिता ठाकरे ने कहा- बालासाहेब ने जो रास्ता दिखाया, उस पर चलने का प्रयास करूंगी
कर्मकांड के बाद स्मिता ठाकरे ने कहा कि गयाजी आकर पितरों का श्राद्ध करना उनके लिए भावुक और सौभाग्यपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने उनके जीवन को दिशा देने का काम किया।
उन्होंने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे की आत्मा की शांति की प्रार्थना करने और उनसे हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगने गयाजी आई हैं। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने जो मार्ग दिखाया है, उस पर चलने का प्रयास करेंगी और सनातन धर्म व उनके विचारों को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।
महिलाओं के पिंडदान पर आचार्यों से ली जानकारी
स्मिता ठाकरे ने पिंडदान को लेकर समाज में प्रचलित मान्यता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें कहा गया था कि महिलाओं द्वारा पिंडदान नहीं किया जाता है। इसके बाद उन्होंने आचार्यों से इस विषय में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि आचार्यों ने उन्हें गयाजी में माता सीता द्वारा राजा दशरथ के लिए पिंडदान किए जाने की कथा सुनाई। इसके बाद उन्होंने धार्मिक विधि के अनुसार अपने पितरों का पिंडदान किया।
गयाजी की परंपरा और आस्था से जुड़ीं स्मिता ठाकरे
स्मिता ठाकरे ने कहा कि गयाजी की पवित्र धरती पर आकर उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। आचार्यों के मार्गदर्शन में सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए। धार्मिक मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंड वेदियों पर पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं।
पितृपक्ष में देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु
गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। स्मिता ठाकरे का विष्णुपद मंदिर पहुंचकर पिंडदान करना भी पितृपक्ष मेले के दौरान आस्था और परंपरा की महत्वपूर्ण तस्वीर बनकर सामने आया।
गया से नितम राज की रिपोर्ट