GAYA: पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पंजाब की एक टीम पिछले 12 वर्षों से लगातार लंगर चला रही है। वर्ष 2014 में शुरू हुई यह सेवा आज हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन और सेवा का बड़ा सहारा बन चुकी है।
पंजाब निवासी विजय गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2013 में वह पिंडदान और पूजा कराने के लिए गयाजी आए थे। उस दौरान दिनभर पूजा करने के बाद उन्हें भोजन के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
विजय गुप्ता ने अपने तीन-चार दोस्तों के साथ मिलकर लंगर शुरू करने का फैसला लिया। सभी दोस्तों ने आपस में सहयोग राशि जुटाई और वर्ष 2014 में पहली बार गयाजी में लंगर की शुरुआत की गई। इसके बाद हर साल पितृपक्ष मेले के दौरान यह सेवा लगातार जारी है।
सुबह की चाय से दिनभर भोजन तक व्यवस्था
लंगर में सुबह करीब 5 बजे से चाय, 8 बजे नाश्ता और इसके बाद दिनभर भोजन की व्यवस्था रहती है। टीम के मुताबिक, रोजाना करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु यहां भोजन करते हैं। पंजाब से आए हलवाई और पूरी टीम मिलकर पंजाबी शैली में भोजन तैयार करती है। यहां श्रद्धालुओं को पराठा, कढ़ी, राजमा, चावल समेत कई तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं।
76 साल की उम्र में भी सेवा में जुटे रामप्रकाश
इस सेवा में 76 वर्षीय रामप्रकाश गुप्ता भी पूरी सक्रियता के साथ योगदान दे रहे हैं। वर्ष 2018 से लंगर सेवा से जुड़े रामप्रकाश गुप्ता टीम के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में हैं। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के बाद घर पर बैठने के बजाय साथियों के साथ गयाजी आकर श्रद्धालुओं की सेवा करना उन्हें ज्यादा अच्छा लगा। उम्र बढ़ने के बावजूद वह हर साल लंगर की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
करीब 18 से 19 दिनों तक चलने वाली इस लंगर सेवा का उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों से गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के भोजन उपलब्ध कराना और उनकी सेवा करना है। 12 वर्षों से जारी यह पहल पितृपक्ष मेले में सेवा और सहयोग की मिसाल बनी हुई है।
गया से नितम राज की रिपोर्ट