GAYA: गया में प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर स्थानीय पंडा समाज और प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विरोध अब खुलकर सामने आने लगा है। पंडा समाज और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉरिडोर निर्माण से धार्मिक परंपराएं, ऐतिहासिक धरोहरें और सदियों पुरानी संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी।


सोमवार को विष्णुपद स्थित विश्राम गृह में श्री विष्णुपद क्षेत्रीय जन जागरण मंच की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित कर कॉरिडोर का कड़ा विरोध किया गया। इस दौरान श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति भी विरोध में शामिल रही। कार्यक्रम में पंडा समाज के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।


‘दैवीय वेदियों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं’

गयापाल पंडा समाज का कहना है कि फल्गु नदी तट और विष्णुपद मंदिर के आसपास स्थित वेदियां केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि दैवीय और पौराणिक महत्व की धरोहर हैं। इन्हीं स्थानों पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न होते हैं। आरोप है कि कॉरिडोर के नक्शे में कई ऐतिहासिक वेदियों और धर्मशालाओं को हटाने या स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है।


पहले समर्थन किया, अब विरोध में उतरे

श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने कॉरिडोर का समर्थन किया था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि इससे गयापाल पंडों की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को भारी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने प्रशासन से कॉरिडोर योजना वापस लेने की मांग की।


‘694 पुराने ढांचे हटाने की तैयारी’

मंच के संरक्षक और रामानुज मठ के मठाधीश स्वामी श्री वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि कॉरिडोर के लिए 200 मीटर के दायरे में आने वाले करीब 694 पुराने ढांचों को हटाने की चर्चा है। इससे सदियों से यहां रह रहे पंडा समाज का अस्तित्व और उनकी आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की कि कॉरिडोर की चौड़ाई और दायरा कम किया जाए ताकि कम से कम लोगों के घर और धार्मिक स्थल प्रभावित हों।


‘पर्यटन नहीं, मोक्ष की भूमि है गया’

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार गया को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है, जबकि यह भूमि सनातन परंपरा में पितरों की मुक्ति और श्राद्ध कर्म के लिए जानी जाती है। उनका कहना है कि भगवान राम, भगवान बलराम, ब्रह्मा जी और चैतन्य महाप्रभु जैसे महापुरुष भी यहां पिंडदान करने आए थे।


मंच के अध्यक्ष रमेश लाल गायव ने आरोप लगाया कि पहले कॉरिडोर की सीमा 75 मीटर थी, जिसे बढ़ाकर 200 मीटर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने स्थानीय लोगों और गयापाल समाज से बिना पर्याप्त चर्चा किए योजना तैयार कर ली, जबकि पुनर्वास नीति भी स्पष्ट नहीं की गई है।


आंदोलन तेज करने की चेतावनी

मंच के सचिव विनोद लाल मेहरवार ने कहा कि गयापाल ब्राह्मण पीढ़ियों से यहां निवास कर रहे हैं और यह सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रेस वार्ता में स्वामी श्री वेंकटेश प्रपन्नाचार्य, रमेश लाल गायव, विनोद मेहरवार, शक्ति सुनील अधिवक्ता, डॉ. अनिल कुमार गुप्ता समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।