GAYAJEE:  पितृपक्ष मेला की तैयारियों के बीच गयाजी में ऑनलाइन पिंडदान को लेकर उठे विरोध के सवाल पर नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि किसी भी व्यवस्था के अपने अलग-अलग पक्ष हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग जिस तरह से पिंडदान करना चाहते हैं, वे अपनी इच्छा के अनुसार कर सकते हैं। सरकार और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि गया जी आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था मिले तथा वे यहां से अच्छा अनुभव लेकर लौटें।


ऑनलाइन पिंडदान को लेकर गयापाल समाज की ओर से आपत्ति जताए जाने के बीच मंत्री नीतीश मिश्रा का यह बयान पितृपक्ष मेले की तैयारियों की समीक्षा बैठक के बाद सामने आया। बिहार पर्यटन विभाग की ओर से पितृपक्ष मेला-2026 के लिए ई-पिंडदान की सुविधा और विभिन्न पिंडदान पैकेज जारी किए गए हैं। दूसरी ओर, गयापाल समाज ने ऑनलाइन माध्यम से धार्मिक कर्मकांड कराए जाने पर सवाल उठाए हैं।


‘जो करना चाहते हैं, आकर करें'

ऑनलाइन पिंडदान के विरोध को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि किसी भी व्यवस्था को लेकर दोनों पक्ष हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग यहां आकर पिंडदान करना चाहते हैं, वे आकर पिंडदान करते हैं। सरकार की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुविधा और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग गया जी पहुंचते हैं। ये श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में यहां आते हैं। ऐसे में प्रशासन का प्रयास है कि उन्हें ऐसी व्यवस्था मिले, जिससे वे धार्मिक कर्मकांड को सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण में पूरा कर सकें।


25 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष मेला

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला इस वर्ष 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मेले की तैयारियां जिला प्रशासन की ओर से जुलाई माह से ही शुरू कर दी गई हैं। शनिवार को समाहरणालय सभागार में मंत्री नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि मेले की तैयारियों में छोटी-छोटी बारीकियों को भी ध्यान में रखा गया है। विशेष रूप से भीड़ नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन की योजना पर जोर दिया गया है, ताकि कहीं भी भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए.


75 हजार से अधिक लोगों के ठहरने की व्यवस्था

पितृपक्ष मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों और पुलिस बल के ठहरने के लिए कुल 75,348 लोगों की क्षमता विकसित की गई है। इसमें एक टेंट सिटी की क्षमता 2,500, 44 सामुदायिक भवन एवं अन्य स्थलों पर 12,070 लोगों के ठहरने की व्यवस्था शामिल है। इसके अलावा पुलिस आवासन के लिए 15 स्थल, 132 होटल व रेस्ट हाउस तथा पंडा जी के निजी भवन एवं धर्मशालाओं में भी व्यापक व्यवस्था की गई है।

मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि गया जी जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। विभाग की ओर से जिन आवश्यकताओं की जरूरत होगी, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा.


AI से भीड़ पर नजर, बच्चों के लिए QR बैंड


इस बार पितृपक्ष मेले में तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर में लगाए गए 543 CCTV कैमरों के माध्यम से AI आधारित भीड़ प्रबंधन और रियल टाइम अलर्ट की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा 67 प्रमुख स्थानों पर 335 अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए QR कोड आधारित रिस्ट बैंड की व्यवस्था की गई है। यह अभिभावक के मोबाइल से लिंक रहेगा। भीड़ में यदि कोई बच्चा परिवार से अलग हो जाता है तो QR कोड के माध्यम से उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

दक्षिण भारतीय और अन्य भाषाओं के श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए AI और ‘भाषिणी’ ऐप की सहायता से रियल टाइम भाषा अनुवाद की व्यवस्था भी की जा रही है। ‘May I Help You’ काउंटर पर श्रद्धालुओं को उनकी मातृभाषा में सहायता देने का प्रयास होगा।


39,500 सफाई कर्मियों की तैनाती

मेला क्षेत्र को पांच जोन और 54 सेक्टरों में बांटा गया है। तीन पालियों में सफाई के लिए करीब 39,500 मानवबल लगाए जाएंगे। फल्गु नदी में कचरा हटाने के लिए Trash Cleaning Boat (Clearbot), ड्रोन से निगरानी और नालों की सफाई के लिए रोबोटिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। मेला क्षेत्र में 579 शौचालय, 134 स्नानागार और 74 चेंजिंग रूम की व्यवस्था की जा रही है. 197 चापाकल और 53 स्टैंड पोस्ट की मरम्मत कराई जा रही है। 18 प्रमुख स्थलों पर RO जल की पनशाला भी लगाई जाएगी।


70 स्वास्थ्य शिविर, 150 ई-रिक्शा और 50 रिंग बस

श्रद्धालुओं की चिकित्सा सुविधा के लिए 70 स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए जाएंगे। इनमें 125 डॉक्टर, 178 पैरामेडिकल स्टाफ और 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मी तैनात रहेंगे। 12 एंबुलेंस और पांच मोबाइल मेडिकल टीम भी काम करेंगी। यातायात व्यवस्था के तहत 18 पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। 50 रिंग बसों का परिचालन होगा, जबकि बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए 150 निःशुल्क ई-रिक्शा चलाए जाएंगे। 


गया के लोगों से बोले- अतिथि देवो भवः की भावना से करें स्वागत

मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि पितृपक्ष मेला केवल जिला प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। गया जिले के प्रत्येक नागरिक और परिवार की भी जिम्मेदारी है कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करें और जरूरत के समय उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा कि गया जी आने वाले श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में यहां पहुंचते हैं। इसलिए उन्हें बेहतर अनुभव देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे गया जी की पहचान और बिहार की छवि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि पितृपक्ष मेला गया और बिहार की ब्रांडिंग का भी बड़ा अवसर है। यहां आने वाले लोगों को अच्छी व्यवस्था और सेवा मिले, यही प्रशासन का प्रयास है। उन्होंने गया वासियों से ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के साथ तीर्थयात्रियों का स्वागत करने की अपील की।


बैठक में नगर विकास विभाग के सचिव अनिमेष कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार, गया नगर निगम के महापौर, उप महापौर, बोधगया नगर परिषद के सभापति, विभिन्न विभागों के अधिकारी, विष्णुपद मंदिर के पुरोहितगण, समाजसेवी और पितृपक्ष मेला कोषांग से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।

गयाजी से नितम राज की रिपोर्ट