Gaya ED Raid: बिहार के गया में बैंक फ्रॉड से जुड़े एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ईडी की पटना टीम ने PMLA की धारा 17 के तहत रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड (RHRL) से जुड़े कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। एजेंसी की कार्रवाई के बाद बैंक लोन, कथित फर्जी दस्तावेज और संपत्तियों की बिक्री से जुड़े मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है।
85 करोड़ के लोन में 58 करोड़ डायवर्ट करने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड पर बैंकों के एक कंसोर्टियम से करीब 85 करोड़ रुपये का लोन लेने और उसमें से लगभग 58 करोड़ रुपये की रकम कथित तौर पर डायवर्ट करने का आरोप है। ईडी को संदेह है कि लोन की राशि हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी या जाली प्रोजेक्ट कंप्लीशन रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया।
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक से प्राप्त रकम का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया गया और करीब 58 करोड़ रुपये की राशि को किन माध्यमों से दूसरी जगह ट्रांसफर या डायवर्ट किया गया। जांच के दौरान बैंकिंग लेन-देन, कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
अखौरी गोपाल और उनके बेटों पर जांच का फोकस
ईडी की जांच में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के नियंत्रण को लेकर अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत एवं नितेश का नाम सामने आया है। बताया गया है कि कंपनी से जुड़े लोन में अखौरी गोपाल और उनके परिवार के सदस्यों की पर्सनल गारंटी भी बैंकों को दी गई थी।
इस वजह से जांच एजेंसी की कार्रवाई में कंपनी के साथ-साथ गारंटर और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ईडी यह भी जांच कर रही है कि लोन की राशि और कंपनी की संपत्तियों के बीच किस तरह का वित्तीय संबंध रहा है।
पांच संपत्तियों को लेकर भी बड़ा सवाल
मामले में पांच संपत्तियों का जिक्र भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, इन संपत्तियों को टाटा मोटर्स से जुड़े बकाये के खिलाफ गिरवी या मॉर्गेज किया गया था। जांच एजेंसी को संदेह है कि बाद में इन संपत्तियों को कथित तौर पर कम कीमत पर बेच दिया गया, जबकि वे पहले से ही गिरवी थीं।
अगर जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो संपत्तियों की बिक्री, उनकी वास्तविक कीमत और बिक्री से प्राप्त रकम के इस्तेमाल को लेकर भी कई सवाल खड़े हो सकते हैं। ईडी इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और लेन-देन की भी जांच कर रही है।
खरीदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में
ईडी की जांच में कुछ खरीदारों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। एजेंसी को आशंका है कि कुछ खरीदार कथित तौर पर बेनामी या प्रॉक्सी हो सकते हैं। ऐसे में जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि संपत्तियों की खरीद के पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन थे और इसके लिए रकम का इंतजाम किसने किया।
फिलहाल ईडी की टीम गया में संबंधित ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही है। तलाशी के दौरान मिलने वाले दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग कागजात और अन्य वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जाएगी। ईडी की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच में एजेंसी को कौन-कौन से अहम दस्तावेज और सबूत मिले हैं और मामले में आगे किन लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। फिलहाल 85 करोड़ रुपये के बैंक लोन, 58 करोड़ रुपये की कथित डायवर्जन और गिरवी संपत्तियों की बिक्री से जुड़ा यह मामला जांच एजेंसी के रडार पर है।