GAYAJEE: गया के दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा की विदाई के दौरान पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई गई। इस मौके पर महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की। भक्ति और भावनाओं से भरे माहौल में महिलाओं ने मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, खुशहाली और परिवार की मंगलकामना के लिए आशीर्वाद मांगा। खास बात यह रही कि इस बार दुर्गा पूजा के आयोजन से लेकर तमाम व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली।
गया शहर के दुर्गाबाड़ी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की गई। पूजा के समापन पर महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म निभाकर माता रानी को भावभीनी विदाई दी। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना की।
सिंदूर खेला के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय और भावुक नजर आया। मां दुर्गा को विदाई देते समय महिलाओं की आंखें नम हो गईं। सभी ने माता रानी से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।
इस बार दुर्गाबाड़ी की दुर्गा पूजा में महिलाओं की भूमिका खास रही। पूजा की तैयारियों से लेकर आयोजन की तमाम व्यवस्थाओं तक, महिलाओं ने पूरी जिम्मेदारी के साथ काम किया। आपसी सहयोग, मेहनत और समर्पण के जरिए उन्होंने पूजा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महिलाओं ने बताया कि सभी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए उन्होंने पूरी मेहनत की। सभी के सहयोग से पूजा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी इसी तरह सामूहिक सहयोग से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी।
गया के दुर्गाबाड़ी में सिंदूर खेला बंगाली संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने नारी शक्ति और सामूहिक सहयोग की मिसाल पेश की। मां दुर्गा की विदाई के साथ ही दुर्गा पूजा का समापन हो गया। अब श्रद्धालुओं को अगले साल माता रानी के आगमन का इंतजार है।