Bihar News: नेताओं की राजनीति अब सिर्फ विकास और जनसमस्याओं तक सीमित नहीं रह गई है. कई बार जनता के बीच खुद को सबसे बड़ा लड़ाकू और दबंग नेता साबित करने की होड़ में जनप्रतिनिधि ऐसी बातें कह जाते हैं, जो बाद में बड़े विवाद का कारण बन जाती हैं. ऐसा ही एक मामला बिहार के गया जिले से सामने आया है, जहां वजीरगंज के बीजेपी विधायक वीरेंद्र सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
वायरल वीडियो में विधायक एक सरकारी अधिकारी पर नाराजगी जाहिर करते हुए मंच से कथित तौर पर अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच भी इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है.
जानकारी के मुताबिक 24 मई को वजीरगंज प्रखंड के बैरिया गांव में तैलिक साहू समाज द्वारा विधायक के सम्मान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे. इसी दौरान क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं, खासकर नाली निर्माण और राजगीर-बोधगया मार्ग स्थित रसलपुर गुमटी के पास बन रहे ओवरब्रिज परियोजना में हो रही देरी का मुद्दा उठा.
इस पर विधायक वीरेंद्र सिंह ने मंच से कहा कि उन्होंने संबंधित परियोजना इंजीनियर को रविवार के दिन बुलाया था, लेकिन अधिकारी ने छुट्टी का हवाला देते हुए आने से इनकार कर दिया और ग्रामीणों से लिखित आवेदन देने की बात कही. इसी बात से नाराज विधायक ने मंच से ही अधिकारी के खिलाफ तीखी टिप्पणी कर दी. आरोप है कि इस दौरान उन्होंने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे सार्वजनिक मंच पर बोलना उचित नहीं माना जाता.
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. कई लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में देरी पर सवाल उठाना और अधिकारियों से जवाब मांगना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है. जनता उन्हें इसी जिम्मेदारी के लिए चुनती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या जवाबदेही तय कराने का तरीका सार्वजनिक मंच से गाली-गलौज होना चाहिए?
स्थानीय लोगों का कहना है कि गया और आसपास का इलाका ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. ऐसे क्षेत्र में किसी जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कई बार जनप्रतिनिधि भीड़ की तालियां बटोरने और खुद को आक्रामक जननेता के रूप में पेश करने के लिए इस तरह के तेवर दिखाते हैं. हालांकि इससे तत्काल राजनीतिक फायदा मिल सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा पर सवाल भी खड़े होते हैं.
यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं मौजूद हैं. जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से जवाब मांगने और सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाने का पूरा अधिकार है. लेकिन लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है.
फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है.