Road Accident: भले ही बिहार सरकार बिना किसी झिझक के यह कहती है कि हम उन विकसित राज्यों में शामिल हो गए हैं, जहां गरीबी, भूखमरी और संसाधनों की कोई कमी नहीं है. लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है. आलम यह है कि राज्य में अगर देखा जाए, तो शायद ही ऐसा कोई गिना-चुना परिवार होगा, जो रोजगार की तलाश में बिहार से बाहर नहीं जाता हो. लेकिन राज्य की बड़ी आबादी आज भी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों के लिए ट्रेनों में बोरियों की भांति भरकर जाती है. वहां भी उन्हें सम्मान के साथ जीवन नहीं मिलता, बल्कि बड़ी मुश्किल से काम मिलता है और उनकी मजदूरी के हिसाब से उन्हें पूरा पैसा भी नहीं मिल पाता. जैसे-तैसे अपने पेट की खातिर उन्हें यह सब करना पड़ता है.


ऐसे ही नरेश मांझी परिवार, जो रोजी-रोटी की तलाश में हरियाणा के सिरसा गया था, घर लौटने के दौरान नरेश मांझी के परिवार की कार कानपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में उनकी 16 वर्षीय बेटी नेहा और 12 वर्षीय बेटे दिलखुश की मौत हो गई, जबकि नरेश, उनकी पत्नी और एक बेटी गंभीर रूप से घायल हैं.


मृतकों की पहचान गया जिले के बाराचट्टी थाना क्षेत्र के खपिया गांव निवासी नरेश मांझी की 16 वर्षीय बेटी नेहा कुमारी और 12 वर्षीय बेटे दिलखुश कुमार के रूप में हुई है. वहीं नरेश मांझी, उनकी पत्नी सावित्री देवी और आठ वर्षीय बेटी स्नेहा कुमारी गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज कानपुर के हैलट अस्पताल (लाला लाजपत राय अस्पताल) में चल रहा है. चिकित्सकों के अनुसार तीनों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.


जानकारी के अनुसार, नरेश मांझी पिछले करीब 25 वर्षों से हरियाणा के सिरसा में एक किसान के यहां खेती-बाड़ी का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे. पिछले नौ वर्षों से उनकी पत्नी और तीनों बच्चे भी उनके साथ वहीं रह रहे थे. परिवार सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन हाल ही में नरेश मांझी के साले के निधन की सूचना मिलने के बाद वे अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अपने परिवार के साथ निजी चारपहिया वाहन से बिहार के लिए रवाना हुए थे.


बताया गया कि उनका गंतव्य गया जिले के डोभी प्रखंड स्थित बजौरा-जोलहाबीघा गांव था, जहां उनके ससुराल पक्ष के लोग रहते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर–प्रयागराज सर्विस पथ पर महाराजगंज क्षेत्र के रोमा के समीप उनकी कार भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि नेहा कुमारी और दिलखुश कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य तीन सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए.


घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया. दोनों बच्चों के शव लाने के लिए नरेश मांझी के मंझले भाई सोमर मांझी, दिनेश दास, वार्ड सदस्य सत्येंद्र दास तथा परिवार की दो महिलाएं कानपुर पहुंच गई हैं. शवों को गांव लाए जाने के बाद पूरे गांव की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.


इस दुखद घटना के बाद ग्रामीण भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े नजर आए. ग्रामीण प्रदीप दास ने बताया कि आपसी सहयोग से तत्काल 10 हजार रुपये की सहायता राशि जुटाकर परिजनों को भेजी गई है. वहीं सामाजिक कार्यकर्ता किरण देवी ने बताया कि परिवार की मदद के लिए ग्रामीणों ने अतिरिक्त 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय लिया है, ताकि इलाज और अन्य जरूरी खर्चों में परिवार को कुछ राहत मिल सके.