Bihar News: दरभंगा नगर निगम के चर्चित शौचालय आवंटन घोटाले में पद से हटाए गए तत्कालीन महापौर वैजयंती देवी खेड़िया, उपमहापौर बदरुज्ज्मा खान और सशक्त स्थायी समिति के नौ सदस्यों पर नगर निकाय चुनाव लड़ने पर लगी रोक बरकरार रहेगी। बिहार सरकार के नियमों के तहत वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप में पदमुक्त किए गए ये जनप्रतिनिधि भविष्य में नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ सकते। सरकार के इस फैसले को पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने भी बरकरार रखा है।


मामला वर्ष 2016 से 2019 के बीच सार्वजनिक शौचालयों की बंदोबस्ती (लीज) प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए एक निजी ठेकेदार को लगभग 27.19 लाख रुपये की अवैध छूट दी गई, जिससे नगर निगम को भारी राजस्व का नुकसान हुआ।


प्रमंडलीय आयुक्त की जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद दिसंबर 2021 में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन महापौर, उपमहापौर और सशक्त स्थायी समिति के सात पार्षदों समेत कुल नौ जनप्रतिनिधियों को उनके पद से हटा दिया था। विभाग ने इन सभी से नगर निगम को हुए 27.19 लाख रुपये के नुकसान की वसूली का भी निर्देश दिया है।


इस मामले की शिकायत 25 जुलाई 2018 को वार्ड पार्षद मधुबाला सिन्हा, पूर्व पार्षद प्रदीप गुप्ता समेत कई लोगों ने प्रमंडलीय आयुक्त से की थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि सार्वजनिक शौचालयों की बंदोबस्ती के लिए 66 लाख रुपये की राशि तय की गई थी, लेकिन नगर निगम ने नियमों के विरुद्ध लगभग 27 लाख रुपये की गैरकानूनी छूट दे दी। 


शिकायत के बाद हुई जांच में आरोप सही पाए गए और इसके आधार पर नगर विकास विभाग ने कार्रवाई की। पदमुक्त किए गए जनप्रतिनिधियों ने इस कार्रवाई को पहले पटना हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दोनों अदालतों ने उनकी याचिकाएं खारिज कर सरकार के फैसले को सही ठहराया।