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28-Jan-2026 09:25 PM
By First Bihar
Bihar police controversy: दरभंगा के बेंता थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक हरेन्द्र कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर के साथ ना सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग करने बल्कि धक्का-मुक्की और धमकी देकर अपनी वर्दी का धौंस दिखाया गया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी थानेदार पर कार्रवाई की गयी है। हरेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
बेंता थानाध्यक्ष हरेन्द्र कुमार द्वारा वर्दी का धौंस दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा था। वीडियो में पु०अ०नि० हरेन्द्र कुमार, थानाध्यक्ष, बेंता द्वारा अपने कर्तव्य के दौरान वाहन चालक के साथ बात-चीत के दौरान गाली-गलौज तथा असभ्य भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। उक्त वायरल वीडियो में पु०अ०नि० हरेन्द्र कुमार, थानाध्यक्ष, बेंता को अपने कर्तव्य के दौरान आम जनता के साथ गाली-गलौज एवं अभद्र व्यवहार करना इनके कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही मनमानेपन एवं उदंडता को परिलक्षित करता है। अतः उपरोक्त आलोक में पु०अ०नि० हरेन्द्र कुमार, थानाध्यक्ष, बेंता को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित किया जाता है तथा निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय पुलिस केन्द्र, दरभंगा रहेगा। यह आदेश विभाग ने जारी किया है।
बता दें कि दरभंगा की जानी-मानी वरिष्ठ चिकित्सक की नातिनी और खुद डॉक्टर अपने ड्राइवर के साथ निजी वाहन से घर लौट रही थीं। इसी दौरान उनका वाहन कथित रूप से वन-वे सड़क में चला गया। यह एक सामान्य ट्रैफिक उल्लंघन था, जिसे चालान या कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाया जा सकता था। लेकिन आरोप है कि मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार ने कानून के दायरे में रहने के बजाय आपा खो दिया। महिला डॉक्टर का आरोप है कि थाना प्रभारी ने बीच सड़क पर गाली-गलौज शुरू कर दी, ड्राइवर को धक्का मारा और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ भी बदसलूकी की गई। वीडियो में थाना प्रभारी का उग्र व्यवहार साफ देखा जा सकता है, जहां वे ऊंची आवाज में अपशब्द कहते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर का दावा है कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि थाना प्रभारी ने डराने की कोशिश तक की।
इस घटना ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया है क्योंकि पीड़िता एक महिला डॉक्टर हैं और उनका परिवार समाज में सम्मानित माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एक पढ़ी-लिखी महिला डॉक्टर के साथ सार्वजनिक स्थान पर ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार पर इस तरह के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी उन पर पत्रकारों से बदसलूकी और अभद्र व्यवहार के आरोप लग चुके हैं। उन मामलों में भी शिकायतें वरीय अधिकारियों तक पहुंची थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया था क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही दरभंगा दौरे पर आने वाले थे और वे लगातार “सुशासन” का संदेश देते रहे हैं। ऐसे में वायरल वीडियो और लगाए गए आरोप उस सुशासन की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगा रहे थे। आम जनता पूछ रही थी कि क्या वर्दी में बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर है, या फिर कानून सबके लिए बराबर है? पीड़ित महिला डॉक्टर ने मांग की थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना है। वहीं, जब इस पूरे मामले को लेकर संबंधित वरीय पदाधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा था कि वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आखिरकार आरोपी थानेदार पर शाम ढलते-ढलते कार्रवाई हो गयी। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
गालीबाज थानाध्यक्ष निलंबित एसएसपी ने कहा अभद्र भाषा से पुलिस की छवि होती है खराब, शहरवासियों से नो इंट्री व वन-वे नियम पालन की अपील वन-वे उल्लंघन के दौरान महिला डॉक्टर के ड्राइवर के साथ गाली-गलौज करने के मामले में एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलरेड्डी ने बेंता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। निलंबन अवधि में थानाध्यक्ष को पुलिस लाइन भेज दिया गया है। एसएसपी ने बताया कि वायरल वीडियो में थाना प्रभारी द्वारा महिला डॉक्टर के ड्राइवर को बीच सड़क पर अशोभनीय और अभद्र भाषा में गालियां देते हुए सुना गया है। यहां तक कि ड्राइवर की मां को भी गाली दी गई। महिला डॉक्टर द्वारा बार-बार संयम बरतने और नियमानुसार चालान काटने का अनुरोध किए जाने के बावजूद थाना प्रभारी का व्यवहार नहीं बदला।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने सदर एसडीपीओ-1 को जांच का आदेश दिया था। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद थानाध्यक्ष को निलंबित किया गया। एसएसपी ने कहा कि पुलिस पदाधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे आम नागरिकों से संयमित और मर्यादित भाषा का प्रयोग करें। इस तरह का व्यवहार पुलिस की छवि को धूमिल करता है और किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। एसएसपी ने शहरवासियों से भी अपील की कि वे नो इंट्री और वन-वे यातायात नियमों का पालन करें ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, लेकिन किसी भी परिस्थिति में अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।