BIHAR NEWS : भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की रिक्त सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। यह सीट पूर्व विधान परिषद सदस्य राधाचरण शाह के इस्तीफे के बाद 16 नवंबर 2025 से खाली पड़ी थी। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होकर मई के मध्य तक पूरी कर ली जाएगी।
निर्वाचन आयोग के अनुसार इस उपचुनाव के लिए 16 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 अप्रैल निर्धारित की गई है। इसके बाद 24 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जिसमें उम्मीदवारों के दस्तावेजों की वैधता परख की जाएगी। यदि कोई प्रत्याशी अपना नाम वापस लेना चाहता है, तो उसके लिए 27 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
इस सीट के लिए मतदान 12 मई 2026 को कराया जाएगा। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद 14 मई 2026 को मतगणना की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 मई 2026 तक हर हाल में संपन्न कर ली जाएगी।
इस उपचुनाव में निर्वाचित होने वाले उम्मीदवार का कार्यकाल सीमित होगा। आयोग के अनुसार विजेता सदस्य 7 अप्रैल 2028 तक ही विधान परिषद का सदस्य रहेगा, क्योंकि यह सीट पूर्व सदस्य के शेष कार्यकाल के लिए ही भरी जा रही है।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे आचार संहिता का सख्ती से पालन करें, ताकि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
गौरतलब है कि राधाचरण शाह ने नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में संदेश विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। विधायक बनने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके कारण यह सीट खाली हो गई थी। वे जुलाई 2015 से नवंबर 2025 तक विधान परिषद के सदस्य रहे थे और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
अब इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने की संभावना है। प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों की तलाश में जुट गए हैं। भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह चुनाव रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
यह उपचुनाव आगामी राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी दे सकता है। ऐसे में सभी दल इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक सकते हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से की गई तैयारियों के बीच अब सभी की नजरें 12 मई को होने वाले मतदान और 14 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।