PM Awas Yojana Fraud: प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम शामिल होने और नई सूची देखने की उम्मीद लगाए लोगों को साइबर अपराधी निशाना बना रहे हैं. ठगों ने योजना के नाम पर फर्जी एपीके फाइल तैयार की है, जिसे व्हाट्सएप के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. इस फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल करते ही निजी डेटा चोरी होने और व्हाट्सएप का नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में जाने का खतरा है. जिले में कई लोग इस ठगी का शिकार हो चुके हैं, जिनमें जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं.


दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना की नई सूची को लेकर ग्रामीण इलाकों में लोग लगातार जानकारी जुटा रहे हैं. इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग पीएम आवास योजना के नाम से फर्जी एंड्रॉयड एप्लीकेशन पैकेज (APK) फाइल भेज रहे हैं. लोगों को बताया जाता है कि इस फाइल के जरिए वे सूची में अपना नाम देख सकते हैं. सरकारी योजना का नाम देखकर कई लोग इसे असली मान लेते हैं और बिना जांच किए फाइल डाउनलोड कर लेते हैं.


साइबर अपराधियों की ओर से भेजी जा रही इस फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल करने के बाद फोन की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. इसके जरिए ठग मोबाइल में मौजूद फोटो, संपर्क सूची, निजी जानकारी और वित्तीय डेटा तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं. व्हाट्सएप का नियंत्रण हासिल होने पर पीड़ित के संपर्क में मौजूद लोगों को भी उसी फर्जी फाइल के संदेश भेजे जा सकते हैं. इस तरह एक व्यक्ति के मोबाइल से शुरू हुई ठगी कई अन्य लोगों तक पहुंच जाती है.


इस साइबर ठगी का शिकार हुए दोबेया निवासी मंजय सिंह ने बताया कि उनके एक परिचित ने प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम देखने के लिए एपीके फाइल भेजी थी. फाइल पर क्लिक करने के बाद उनका व्हाट्सएप लॉगआउट हो गया और मोबाइल से कई ऐप भी हट गए. इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ.


मंजय सिंह ने तुरंत अपना मोबाइल फैक्ट्री रीसेट कर दिया. इससे वह संभावित वित्तीय नुकसान से बच गए, लेकिन उनके मोबाइल का डेटा खो गया. इसी तरह चरपोखरी के विशाल कुमार, प्रदीप कुमार और कई जनप्रतिनिधियों के साथ भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं. कई लोग अपने व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए संपर्कों को आगाह कर रहे हैं कि उनके नाम से आने वाले पैसों की मांग वाले संदेशों पर भरोसा न करें.


साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए लगातार सरकारी योजनाओं और सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे पहले आरटीओ चालान और पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर भी फर्जी एपीके फाइलें भेजे जाने के मामले सामने आए थे. कभी चालान भरने तो कभी किस्त या लाभार्थी सूची की जानकारी देने के बहाने लोगों को फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है.


अब प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर इसी तरह का जाल फैलाया जा रहा है. सरकारी योजना से जुड़ा संदेश होने के कारण लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं. इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर अपराधी मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी तक पहुंचने और पीड़ित के संपर्कों को भी निशाना बनाने की कोशिश करते हैं.


साइबर डीएसपी रौशन कुमार ने लोगों को अनजान ऐप और फाइलों से सावधान रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें. एंड्रॉयड यूजर गूगल प्ले स्टोर और आईफोन यूजर ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें. व्हाट्सएप या दूसरे माध्यमों से मिलने वाली अनजान एपीके फाइल को इंस्टॉल करने से बचें.


उन्होंने यह भी सलाह दी कि व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखें, ताकि अकाउंट की सुरक्षा मजबूत हो सके. यदि किसी व्यक्ति ने गलती से संदिग्ध फाइल इंस्टॉल कर ली है, तो उसे तुरंत साइबर सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए. जरूरत पड़ने पर साइबर विशेषज्ञों की मदद लें और अपने बैंक खातों तथा अन्य संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.


प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भेजे जा रहे ऐसे संदेशों से बचने के लिए जरूरी है कि लोग किसी भी अनजान फाइल पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें. लाभार्थी सूची की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या अधिकृत माध्यमों का ही इस्तेमाल करें.