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बिहार के एक खनन इंस्पेक्टर का ‘सेटिंग मॉडल’ बेनकाब...शिकायतकर्ता को ही सेट कर लिया, अकाउंट में लाखों रू लेने की बात हुई प्रमाणित तो आवेदक ही पलट गया, क्या दर्ज होगा केस ?

भोजपुर में खनन निरीक्षक पर UPI से 3.80 लाख रुपये लेकर ट्रक छोड़ने का आरोप लगा, लेकिन जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने शपथपत्र देकर केस वापस लेने की गुहार लगा दी। जबकि सरकार ने 2024 में स्पष्ट आदेश दिया है कि शिकायत वापस नहीं ली जा सकती।

28-Feb-2026 03:46 PM

By Viveka Nand

Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है. कुछ ऐसे विभाग हैं, जहां के अफसरों ने करप्शन की सारी सीमाओं को लांघ दिया है. रिश्वतखोरी की शिकायत भी होती है, लेकिन जांच पूर्ण होने से पहले ही शिकायतकर्ता को सेट कर लिया जाता है. वहीं शिकायतकर्ता जिसने संबंधित अधिकारी के खिलाफ घूस लेने का आरोप लगाता है, बाद में शपथपत्र देकर कहता है कि हमें अब कोई शिकायत नहीं. हम अपना आवेदन वापस लेते हैं. हालांकि सरकार का स्पष्ट आदेश है, कोई व्यक्ति किसी सरकारी पदाधिकारी या कर्मी के खिलाफ एक बार किसी मामले में शिकायत दायर कर इसे वापस नहीं ले पाएगा. ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होगी. इस संबंध में जनवरी 2024 में ही पत्र जारी किया गया है. 

यूपी के ट्रक मालिक ने की थी शिकायत, डीएम ने गठित की थी जांच टीम

मामला खनन विभाग के एक माइन्स इंस्पेक्टर से जुड़ा है. भोजपुर जिले के तत्कालीन खान निरीक्षक चंदन कुमार पर यूपीआई के माध्यम से लगभग 4 लाख रू लेकर ट्रक छोड़ने के आरोप लगे. उत्तर प्रदेश के एक ट्रक मालिक ने खान निरीक्षक चंदन कुमार पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. चंदन कुमार व अन्य पर आरोप था कि लाखों रुपए यूपीआई के माध्यम से लेकर जब्त ट्रक को छोड़ा गया. शिकायत के बाद भोजपुर जिलाधिकारी ने जांच टीम का गठन किया और खनन निरीक्षक के खिलाफ लगे आरोपों की गहनता से जांच कर विस्तृत जांच प्रतिवेदन मांगा था. हालांकि वर्तमान में खनन निरीक्षक चंदन कुमार स्थानांतरित होकर वैशाली चले गए हैं. 

शिकायतकर्ता के खाते से 1 लाख भेजे जाने की पुष्टि....

जांच टीम में भोजपुर के वरीय उप समाहर्ता मो. मोइद जिया, साईबर थाने के डीएसपी शामिल थे. जांच दल में शामिल पुलिस उपाधीक्षक सह थानाध्यक्ष भोजपुर साइबर थाना ने 7 और 25 जनवरी 2026 को आरोपित खनन निरीक्षक चंदन कुमार के द्वारा अवैध वसूली से संबंधित तकनीकी प्रतिवेदन वरीय उप समाहर्ता मो. मोईद जिया को सौंपा, जिसमें बैंक/ यूपीआई लेनदेन से संबंधित विवरण था. परिवादी राम प्रताप सिंह ने बैंक खाता में यूपीआई के माध्यम से पैसा लेने का आरोप लगाया था. इन आरोपों की जांच कराई गई . खाताधारक सन्नी कुमार सिंह के खाते में अलग-अलग यूपीआई/ बैंक खाता से पैसे का हस्तांतरण किया गया था. जांच में यह बात सामने आई कि शिकायतकर्ता (ट्रक मालिक)  के खाते से  25 अप्रैल 2024 को खाताधारक सन्नी कुमार सिंह के खाते में ₹100000 व अन्य के खाते से भी बड़ी राशि आई थी. इस तरह से उस दिन आरोपी खनन निरीक्षक के शागिर्द के खाते में 3 लाख 80 हजार की राशि भेजी गई थी. खाताधारक ने उक्त राशि को चेक एवं एटीएम के माध्यम से अलग-अलग तारीख में निकासी किया. 

भोजपुर जिलाधिकारी को भेजी गई है रिपोर्ट 

9 फरवरी 2026 को भोजपुर जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में जांच अधिकारी (वरीय उप समाहर्ता) ने स्पष्ट किया है कि पुलिस उपाध्यक्ष साइबर थाना की रिपोर्ट से स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि चंदन कुमार तत्कालीन खाना निरीक्षक भोजपुर, उनके ड्राइवर व सैप जवान के बैंक/ यूपीआई में कोई राशि हस्तांतरित की गई है या नहीं . जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कॉल के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि चंदन कुमार के मोबाइल नंबर से उक्त खाता धारक के मोबाइल पर बातचीत नहीं हुई है.साथ ही एक कॉमन मोबाइल नंबर पर भी बातचीत नहीं हुई है.

शिकायतकर्ता ने कहा- अब हमें खान इंस्पेक्टर से शिकायत नहीं, केस वापस ले रहे 

जांच रिपोर्ट में वरीय उप समाहर्ता मोहम्मद मोईद जिया ने उल्लेख किया है कि परिवादी ट्रक मालिक राम प्रताप सिंह एवं आरोपित चंदन कुमार तत्कालीन खाना निरीक्षक भोजपुर को कार्यालय में उपस्थित होकर पक्ष रखने को कहा गया. जिसमें दोनों ने अपना-अपना पक्ष रखा और जांच से संबंधित दस्तावेज समर्पित किया. परिवादी राम प्रताप सिंह द्वारा जो पक्ष रखा गया उसमें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया, साथ ही आरोपित खाना निरीक्षक, ड्राइवर व सैप जवान के साथ उनके द्वारा किए गए बैंक खाता, यूपीआई से ट्रांसफर से संबंधित साक्ष्य नहीं दिया. इसी बीच 10 जनवरी 2026 को परिवादी (ट्रक मालिक) ने कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथ पत्र दिया. जिसमें शपथ कर्ता ने कहा कि खनन अधिकारी से कोई द्वेष नहीं है, साथ ही खनन अधिकारी के खिलाफ की गई शिकायत को समाप्त करने का अनुरोध किया.

साइबर डीएसपी ने शिकायत वापस लेने का शपथ पत्र देने पर केस दर्ज करने की थी सिफारिश 

वही, जांच टीम में शामिल पुलिस अधीक्षक साइबर थाना ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि परिवादी द्वारा जांच में आवश्यक सहयोग नहीं किया गया. शपथ पत्र के माध्यम से परिवाद वापस लेने का पत्र दिया गया है. ऐसे में इनके खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिक दर्ज करना अनुसंधान करना आवश्यक प्रतीत होता है.