Bharat Tiwari Encounter Case: भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच तेज हो गई है। जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग के अध्यक्ष और पटना उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा बुधवार को पहली बार आरा पहुंचे। उन्होंने जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) स्थित आयोग के कार्यालय में पहुंचकर जांच प्रक्रिया की शुरुआत की और घटना से जुड़े गवाहों को सम्मन जारी किया। 


आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि जांच के मुख्य रूप से दो बिंदु होंगे। पहला, 17 जून को शाहपुर के बिलौटी गांव में हुई एनकाउंटर की घटना का औचित्य क्या था और दूसरा, इस घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई, पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है, इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर न्यायिक आयोग का गठन किया गया है।


जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि आयोग को कुछ आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में देरी हुई थी, जिसके कारण जांच प्रक्रिया शुरू होने में थोड़ा विलंब हुआ। अब जांच में तेजी लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े गवाहों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुधवार को सम्मन जारी कर दिया गया है। आयोग जल्द से जल्द महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का प्रयास करेगा।


जांच की समय सीमा के सवाल पर उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर आयोग को छह महीने का समय दिया जाता है। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। उनका प्रयास रहेगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर ही रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर मामले से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी।


भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने जिला शिक्षा कार्यालय परिसर स्थित जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) में आयोग का कार्यालय उपलब्ध कराया है। बुधवार दोपहर पहली बार आयोग के अध्यक्ष के पहुंचने से जिला मुख्यालय में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गईं। इस दौरान पटना प्रमंडल के कमिश्नर मयंक बड़बड़े, डीआईजी सत्य प्रकाश, डीएम तनय सुल्तानिया समेत कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।