Bihar Corruption News: आरा में डाक विभाग में रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है. पटना सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने तीन महीने से लंबित शाखा डाकपाल के वेतन को जारी करने के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. मामले में उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार को भी आरोपित बनाया गया है, लेकिन वह फिलहाल फरार है.


सीबीआई के अनुसार, शाखा डाकपाल संदीप कुमार ने एक जुलाई 2026 को छोटकी सासाराम स्थित उप डाकघर में योगदान किया था. योगदान के बाद से उनका करीब तीन महीने का वेतन लंबित था. आरोप है कि वेतन जारी कराने के लिए उन पर रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था.


शिकायत के अनुसार, 26 सितंबर को संदीप कुमार को आरा नार्थ उपमंडलीय कार्यालय बुलाया गया था. वहां उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार ने कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की. आरोप है कि रिश्वत देने पर ही लंबित वेतन जारी करने का भरोसा दिया गया था. इसके बाद संदीप कुमार ने पटना सीबीआई की एसीबी इकाई में शिकायत दर्ज कराई.


शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और रिश्वत लेते हुए आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. कार्रवाई के दौरान रविवार रात आरा प्रधान डाकघर के आवासीय परिसर से डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार को 10 हजार रुपये लेते गिरफ्तार कर लिया गया.


गिरफ्तार डाक सहायक की पहचान चांदी थाना क्षेत्र के भगवतपुर-तापा जलपुरा गांव निवासी पुरुषोत्तम कुमार के रूप में हुई है. वह पहले आरा उपमंडलीय कार्यालय में पर्यवेक्षक यानी ओवरसियर के पद पर तैनात था. वर्तमान में वह अरवल उपमंडलीय कार्यालय में डाक सहायक के पद पर कार्यरत था. दो दिन पहले ही पदोन्नति के बाद उसका स्थानांतरण हुआ था.


उपमंडलीय निरीक्षक की तलाश में पटना में छापेमारी

मामले में आरोपित उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई टीम ने पटना में भी छापेमारी की. टीम बेऊर जेल के पास स्थित एक आवासीय कॉलोनी में पहुंची, लेकिन आरोपी वहां नहीं मिला. उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई की कार्रवाई जारी है.


गिरफ्तार डाक सहायक को पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया. उसे सीबीआई की विशेष अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई.


इलेक्ट्रानिक साक्ष्य भी मिले

सीबीआई की एसीबी इकाई के अनुसार, मामले में चार अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी. जांच के दौरान टीम को मामले से जुड़े इलेक्ट्रानिक साक्ष्य भी मिले हैं. अब इन साक्ष्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिश्वत मांगने से लेकर लंबित वेतन जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है.


सीबीआई यह भी पता लगा रही है कि दोनों आरोपितों की रिश्वत मांगने और सरकारी कार्य के एवज में अवैध राशि लेने में क्या भूमिका थी. मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है.


फरार उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार की तलाश के साथ सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि इस मामले में रिश्वतखोरी का दायरा कितना बड़ा है और क्या इसमें विभाग के अन्य लोगों की भी कोई भूमिका रही है.