Vikramshila Setu Latest Update: भागलपुर और नवगछिया के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से परेशानी का कारण बने विक्रमशिला सेतु पर तीसरे बेली ब्रिज का फ्रेम अब लगभग तैयार हो चुका है। पिछले कई दिनों से युद्धस्तर पर चल रहे निर्माण कार्य में अब तेजी दिखाई दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर इसका काम पूरा कर लिया जाएगा।
गंगा नदी पर बने इस महत्वपूर्ण पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद से लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ गई थीं। रोजाना हजारों लोगों को घंटों जाम और वैकल्पिक रास्तों की परेशानी झेलनी पड़ रही थी। कई लोग नाव के सहारे गंगा पार करने को मजबूर हो गए थे। ऐसे में तीसरे बेली ब्रिज का निर्माण स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
बुधवार को भी पुल पर इंजीनियरों और मजदूरों की टीम लगातार काम में जुटी रही। फिलहाल ब्रिज के दोनों ओर लोहे के एंगल को जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। इसके बाद इस पर मजबूत लोहे की प्लेटें लगाई जाएंगी ताकि पुल पर वाहनों का दबाव आसानी से झेला जा सके। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसम ने बीच में थोड़ी परेशानी जरूर खड़ी की थी, लेकिन अब काम फिर से रफ्तार पकड़ चुका है।
दरअसल, पिछले दिनों आए तेज आंधी-तूफान और बारिश की वजह से कुछ घंटों के लिए निर्माण कार्य रोकना पड़ा था। हालांकि मौसम साफ होते ही टीम ने दोबारा काम शुरू कर दिया। अधिकारियों का दावा है कि अब दिन-रात काम चल रहा है ताकि जल्द से जल्द लोगों को राहत दी जा सके।
तीसरे बेली ब्रिज की जरूरत तब पड़ी जब विक्रमशिला सेतु का एक मुख्य स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया था। इस घटना के बाद पूरे पुल की तकनीकी जांच कराई गई। जांच में पता चला कि टूटे हुए हिस्से के आगे और पीछे के दो अन्य स्पैन भी कमजोर हो चुके हैं। इसके बाद विशेषज्ञों की सलाह पर तीन अस्थायी बेली ब्रिज बनाने का फैसला लिया गया।
इनमें से दो बेली ब्रिज पहले ही तैयार किए जा चुके हैं, जबकि अब आखिरी और सबसे अहम तीसरे ब्रिज का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि यह करीब 24 मीटर लंबा बेली ब्रिज है, जिसे काफी मजबूत तरीके से तैयार किया जा रहा है ताकि भारी वाहनों का दबाव भी सह सके।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुल पूरी तरह तैयार होने के बाद इसकी तकनीकी जांच IIT पटना की विशेषज्ञ टीम करेगी। टीम तीनों बेली ब्रिज की मजबूती, भार क्षमता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच करेगी। जब तक IIT की टीम इसे पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर देती, तब तक पुल पर वाहनों का परिचालन शुरू नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार पहले ट्रायल के तौर पर हल्के वाहनों को चलाया जाएगा। उसके बाद धीरे-धीरे बड़े वाहनों के परिचालन पर फैसला लिया जाएगा। यदि सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही भागलपुर और नवगछिया के बीच यातायात सामान्य हो सकता है।
विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं बल्कि भागलपुर, नवगछिया और आसपास के कई जिलों की लाइफलाइन माना जाता है। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ा था। कई एंबुलेंस तक घंटों जाम में फंस रही थीं। व्यापारियों को माल ढुलाई में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।