Vikramshila Setu : ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य अब तेजी पकड़ चुका है। पुल पर 170 फीट लंबे पहले बेली ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम ने शनिवार को रैंप निर्माण, प्लेट संयोजन और अंतिम तकनीकी फिटिंग का काम भी समाप्त कर दिया। इसके साथ ही सेतु पर वैकल्पिक यातायात बहाल करने की दिशा में बड़ी प्रगति मानी जा रही है।


बीआरओ अधिकारियों के अनुसार, पहले बेली ब्रिज का स्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार हो चुका है। शुक्रवार रात भर इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों की टीम ने लगातार काम कर बाकी बचे हिस्सों को पूरा किया। लोहे की प्लेटें और चादरें पहले ही बिछाई जा चुकी थीं, जबकि शनिवार को अंतिम फिटिंग और तकनीकी परीक्षण किए गए। अब इसकी मजबूती और सुरक्षा का अंतिम आकलन किया जा रहा है।


इधर, नवगछिया छोर पर 12 मीटर लंबे दूसरे बेली ब्रिज का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। इसके लिए फाउंडेशन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। बीआरओ ने लक्ष्य रखा है कि अगले तीन से चार दिनों में इस हिस्से का निर्माण भी पूरा कर लिया जाए। इसके लिए आवश्यक लोहे की संरचनाएं, प्लेटें और अन्य उपकरण साइट पर पहुंचा दिए गए हैं।


अधिकारियों ने बताया कि दूसरे बेली ब्रिज के पूरा होते ही भागलपुर की ओर 24 मीटर लंबे तीसरे बेली ब्रिज के निर्माण का कार्य आरंभ होगा। तीसरे पुल के लिए भी सामग्री मंगाई जा चुकी है और अगले दो दिनों में इसके साइट पर पहुंचने की संभावना है। बीआरओ लगातार युद्धस्तर पर काम कर रहा है ताकि जून के पहले सप्ताह तक विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का परिचालन दोबारा शुरू कराया जा सके।


विक्रमशिला सेतु बिहार के पूर्वी हिस्से के लिए लाइफलाइन माना जाता है। पुल पर यातायात बंद होने से भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कोसी-सीमांचल के कई जिलों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बेली ब्रिज निर्माण कार्य को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।


उधर, सेतु की मौजूदा संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण भी जारी है। पटना आईआईटी समेत कई विशेषज्ञ संस्थानों की टीम पुल की गहन जांच में जुटी हुई है। आधुनिक मशीनों और उपकरणों की सहायता से पुल की भार क्षमता, कंपन, दरारों और लोहे की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण किया जा रहा है।


विशेषज्ञों की टीम खासतौर पर नवगछिया की ओर अधिक संवेदनशील हिस्सों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थायी मरम्मत और सुरक्षा योजना तैयार की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से यातायात बहाल करना है। बीआरओ अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। लगातार निगरानी और तकनीकी परीक्षण के बीच विक्रमशिला सेतु को फिर से चालू करने की दिशा में तेजी से काम जारी है।