Bihar News: भागलपुर जिले के हबीबपुर थाना क्षेत्र से रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई। इमरानपुर पंचायत की पूर्व मुखिया जाहिदा खातून के जनाजे के दौरान हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से कई लोग झुलस गए। हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और मौके पर चीख-पुकार के साथ भगदड़ की स्थिति बन गई।



प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जनाजे को कंधा दे रहे और पीछे चल रहे कई लोग अचानक बिजली के तेज झटके की चपेट में आ गए। करंट लगते ही कई लोग सड़क पर गिर पड़े। इस दौरान अपनी जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय युवकों ने तत्परता दिखाते हुए बिजली आपूर्ति बंद कराने के लिए तुरंत पावर हाउस को सूचना दी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।



जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 10 बजे पूर्व मुखिया जाहिदा खातून का जनाजा उनके पैतृक गांव इमामपुर पंचायत से कब्रिस्तान के लिए निकला था। करीब 10:45 बजे जब जनाजा हबीबपुर अस्पताल के पास मुख्य मार्ग पर पहुंचा, तभी रास्ते में नीचे की ओर लटक रहा बिजली का तार जनाजे के संपर्क में आ गया।



हादसे में एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों को करंट लगने की पुष्टि हुई है। स्थानीय ग्रामीणों और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH), मायागंज में भर्ती कराया गया।



अस्पताल में भर्ती घायलों में इमरानपुर के सरपंच के पुत्र अल्ताफ इमरान (30 वर्ष) की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। इसके अलावा 13 वर्षीय मो. खुशहाल, 13 वर्षीय मो. शाहबाज खान और 32 वर्षीय मो. अफरोज समेत कई अन्य घायलों का इलाज मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में चल रहा है।



हादसे के बाद हबीबपुर और आसपास के ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य सड़क पर ट्रांसफॉर्मर काफी नीचे लगा हुआ है और लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण पेड़ों की टहनियां बिजली के तारों को ढके हुए थीं।



ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों के कारण लोगों को नीचे लटक रहे खतरनाक तार दिखाई नहीं दिए, जिसके चलते यह हादसा हुआ। उन्होंने सरकार से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद प्रशासन और बिजली विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है और किन स्तरों पर लापरवाही हुई।