Bihar News:  बिहार के भागलपुर जिले में सरकारी स्कूलों में सामग्री खरीद को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े एक मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि विद्यालयों में सामान खरीद के नाम पर फर्जी बिलों का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं, जिनमें बिल की तारीखों में बदलाव, जीएसटी रहित बिल और खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।


मामला बिहपुर प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय, अमरपुर से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, लत्तीपुर निवासी सौरभ कुमार ने सहयोग पोर्टल के माध्यम से विद्यालयों में हुई खरीदारी से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके बाद शिक्षा विभाग के निर्देश पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे रिकॉर्ड में कई गड़बड़ियां सामने आईं।


बिना सत्यापन के लगाए गए बिलों पर सवाल

शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक, विद्यालय की ओर से लगाए गए कई बिल प्रमाणित नहीं पाए गए हैं। आरोप है कि प्रधानाध्यापक स्तर पर बिना आवश्यक सत्यापन के इन बिलों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया। साथ ही, सरकारी अनुदान की राशि खर्च करने के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया में भी लापरवाही सामने आई है।


नियमों के अनुसार, पांच हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर जीएसटी युक्त वैध बिल जरूरी होता है। लेकिन संबंधित विद्यालय के कुछ बिलों में जीएसटी का उल्लेख नहीं मिलने से खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।


बिलों में तारीख बदलने का आरोप

जांच में सामने आए दस्तावेजों में कई बिलों पर ओवरराइटिंग के निशान मिलने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कुछ बिलों में वर्ष 2023 को बदलकर 2024 किया गया।


बताया जा रहा है कि सीमा जनरल स्टोर के एक बिल में 7 नवंबर 2023 की तारीख को बदलकर 7 नवंबर 2024 किया गया। इसी तरह एक अन्य इंटरप्राइजेज के बिल में 9 दिसंबर 2023 की जगह 2024 अंकित किए जाने का मामला सामने आया है। सांवरिया काटन और मनोज इंटरप्राइजेज के बिलों में भी तारीखों में बदलाव के आरोप लगाए गए हैं।


दुकान के अस्तित्व पर भी उठे सवाल

मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। विद्यालय के नाम पर 15 हजार रुपये का एक कैश मेमो मिला है, जिसमें सीमा जनरल स्टोर का नाम दर्ज है। स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित बाजार में इस नाम की कोई दुकान मौजूद नहीं है।


वहीं, बिल पर दर्ज मोबाइल नंबर को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह नंबर एक सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका के पति से जुड़ा है। हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्षों का बयान सामने आना बाकी है।


पत्नियों के नाम पर फर्म बनाकर बिल लगाने का आरोप

शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ जगहों पर प्रधानाध्यापकों द्वारा अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर जीएसटी पंजीकृत फर्म बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि इन्हीं फर्मों के माध्यम से स्कूलों में सामग्री आपूर्ति दिखाकर भुगतान कराया जाता है।


यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कई मामलों में वास्तविक खरीदारी और कागजों पर दिखाई गई सामग्री में अंतर हो सकता है। बिल तैयार करने की प्रक्रिया में प्रखंड स्तर के कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।


प्रधानाध्यापक ने दी सफाई

राजकीय मध्य विद्यालय अमरपुर के प्रधानाध्यापक नरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने सीमा जनरल स्टोर से खरीदारी की थी। उनके अनुसार, उस समय दुकान संचालित थी, लेकिन वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने दीपक हार्डवेयर से मोटर खरीदने की बात भी कही।


फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से मामले की जांच की जा रही है। अब यह देखना होगा कि जांच में सामने आए आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।