BIHAR NEWS : बिहार के भागलपुर सदर अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां तैनात एक ईएनटी (कान, नाक और गला) विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. राजीव निराला पिछले चार वर्षों से लगातार ड्यूटी से गायब हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से अनुपस्थित रहने के बावजूद न तो उन्होंने अपना त्यागपत्र दिया है और न ही विभागीय स्तर पर उनकी सेवा समाप्त करने की कोई ठोस कार्रवाई हो पाई है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों की बढ़ती परेशानी के बीच यह मामला अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
ड्यूटी जॉइन करने के बाद से ही गायब
जानकारी के अनुसार, डॉ. राजीव निराला ने सदर अस्पताल में योगदान देने के बाद ही अपनी ड्यूटी से दूरी बना ली। उसके बाद से वे न तो अस्पताल में उपस्थित हुए और न ही स्वास्थ्य विभाग के किसी पत्र या निर्देश का जवाब दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर को कई बार उनके पंजीकृत पते पर नोटिस और पत्र भेजे गए, जिसमें उन्हें तत्काल योगदान देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन हर बार इन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला।
चार साल से जारी है “हाजिरी काटने की औपचारिकता”
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय से अनुपस्थित रहने के बावजूद डॉक्टर की उपस्थिति रजिस्टर में रोजाना हाजिरी काटी जा रही है। हालांकि यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गई है, जिसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं दिख रहा।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने इस मामले को लेकर कई बार मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी है और डॉक्टर के खिलाफ निलंबन की अनुशंसा भी की जा चुकी है। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
मरीजों पर पड़ रहा सीधा असर
भागलपुर सदर अस्पताल में रोजाना औसतन करीब 100 से अधिक ईएनटी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार विभाग में दो ईएनटी डॉक्टरों की नियुक्ति है, लेकिन एक डॉक्टर के लंबे समय से अनुपस्थित रहने के कारण पूरा भार दूसरे चिकित्सक पर आ गया है। इसका सीधा असर मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मरीजों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है और कई बार उचित समय पर इलाज न मिलने से स्थिति और भी बिगड़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले ही डॉक्टरों की कमी रहती है, ऐसे में इस तरह की लापरवाही आम जनता के लिए और ज्यादा परेशानी पैदा कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चार साल तक एक डॉक्टर की अनुपस्थिति और फिर भी किसी ठोस कार्रवाई का न होना सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना सूचना अनुपस्थित रहता है, तो नियमों के अनुसार उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन इस मामले में कार्रवाई की धीमी गति कई सवाल खड़े कर रही है।
अस्पताल प्रशासन की मजबूरी या लाचारी?
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से सभी जरूरी रिपोर्ट और पत्राचार मुख्यालय को भेज दिया है। अब आगे की कार्रवाई उच्च स्तर से ही होनी है। वहीं, स्थानीय स्तर पर प्रशासन केवल उपस्थिति दर्ज करने तक ही सीमित रह गया है। यह स्थिति यह भी दिखाती है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकार सीमित होने के कारण कई बार ऐसे मामलों में निर्णय लेने में देरी होती है।
लोगों में नाराजगी और सवाल
स्थानीय लोगों और मरीजों के बीच इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब डॉक्टर सालों से अनुपस्थित हैं, तो उनकी जगह पर नई नियुक्ति क्यों नहीं की गई। साथ ही विभागीय लापरवाही के कारण आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अब सबकी नजर कार्रवाई पर
चार साल से लंबित इस मामले ने अब प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग जल्द इस पर सख्त कार्रवाई करेगा और अस्पताल में ईएनटी सेवाओं को सुचारु रूप से बहाल किया जाएगा। फिलहाल, यह मामला न सिर्फ भागलपुर सदर अस्पताल की व्यवस्था को उजागर करता है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।