Railway News: भागलपुर और आसपास के इलाकों में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भारतीय रेलवे ने करीब 4,600 करोड़ की कई बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भागलपुर से झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क और बेहतर होगा. साथ ही ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने, मालगाड़ियों के परिचालन की क्षमता बढ़ने और भागलपुर स्टेशन पर इंजन बदलने की समस्या खत्म होने की उम्मीद है.
रेल मंत्रालय की ओर से संसद में स्थानीय सांसद अजय कुमार मंडल के सवाल के जवाब में भागलपुर क्षेत्र में स्वीकृत रेल परियोजनाओं और यात्री सुविधाओं से जुड़ी जानकारी दी गई है. इन परियोजनाओं में भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट रेलखंड का दोहरीकरण, सबौर-गोनूधाम बायपास लाइन और भागलपुर-जमालपुर के बीच तीसरी रेल लाइन प्रमुख हैं.
3,169 करोड़ से भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट रेलखंड का होगा दोहरीकरण
रेल मंत्रालय के अनुसार 177 किलोमीटर लंबे भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट रेलखंड को सिंगल लाइन से डबल लाइन में बदलने के लिए 3,169 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है. इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है.
फिलहाल इस रेलखंड के कई हिस्सों में सिंगल लाइन होने के कारण ट्रेनों के परिचालन पर दबाव रहता है. दोहरीकरण का काम पूरा होने के बाद इस रूट की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के परिचालन में ज्यादा सुविधा होगी.
इस परियोजना का असर भागलपुर से झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क पर भी पड़ेगा. भागलपुर से हावड़ा जाने वाली कई ट्रेनें वर्तमान में मालदा के रास्ते संचालित होती हैं. दुमका-रामपुरहाट रेलखंड के दोहरीकरण के बाद इस मार्ग से हावड़ा की ओर सीधी रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की संभावना है.
इससे देवघर, बासुकीनाथ और तारापीठ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी आसान हो सकती है. रेल मंत्रालय के अनुसार परियोजना के पूरा होने के बाद माल ढुलाई की क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा और करीब 15 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई संभव हो सकेगी.
303 करोड़ से बनेगी सबौर-गोनूधाम बायपास लाइन
भागलपुर रेल नेटवर्क की एक और महत्वपूर्ण परियोजना सबौर से गोनूधाम के बीच बायपास रेल लाइन है. पूर्व रेलवे के तहत 13.38 किलोमीटर लंबी इस बायपास लाइन के निर्माण पर 303.20 करोड़ खर्च किए जाएंगे.
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भागलपुर में ट्रेनों के इंजन रिवर्सल की समस्या को खत्म करने में मिलेगा. वर्तमान व्यवस्था में कुछ ट्रेनों को भागलपुर में इंजन बदलने या दिशा बदलने की जरूरत पड़ती है, जिसमें अतिरिक्त समय लगता है.
बाराहाट-भागलपुर रेलखंड पर ट्रेनों की परिचालन क्षमता पर लगातार दबाव बना हुआ है. बायपास लाइन बनने के बाद गोनूधाम को नए जंक्शन के रूप में विकसित कर उसे सबौर से जोड़ा जाएगा. इससे ट्रेनों को भागलपुर स्टेशन पर इंजन रिवर्सल की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनके परिचालन में समय की बचत होगी.
भागलपुर-जमालपुर के बीच बनेगी तीसरी रेल लाइन
भागलपुर और जमालपुर के बीच बढ़ते रेल यातायात को देखते हुए तीसरी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है. 53 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड पर तीसरी लाइन के लिए 1,156 करोड़ की राशि आवंटित की गई है. इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है.
भागलपुर-जमालपुर रेलखंड बिहार के प्रमुख व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है. इस रूट पर यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी परिचालन होता है. वर्तमान में प्रतिदिन करीब 45 से 50 मालगाड़ियां इस रेलखंड से गुजरती हैं.
तीसरी लाइन बनने के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के परिचालन को अलग-अलग ट्रैक पर संचालित करने में मदद मिलेगी. इससे ट्रेनों के बीच परिचालन संबंधी दबाव कम होगा और सुपरफास्ट व एक्सप्रेस ट्रेनों को बेहतर गति से चलाने की सुविधा मिल सकती है.
नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता भी होगा आसान
रेलवे की इन परियोजनाओं का असर केवल मौजूदा ट्रेनों के परिचालन तक सीमित नहीं रहेगा. रेल लाइन की क्षमता बढ़ने के बाद भविष्य में नई यात्री ट्रेनों को चलाने और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की संभावना भी बढ़ेगी.
भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट रेलखंड के दोहरीकरण, सबौर-गोनूधाम बायपास और भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन के पूरा होने के बाद भागलपुर का रेल नेटवर्क पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगा.