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घर से एक साथ उठी पति-पत्नी की अर्थी, गांव में पसरा मातम

भागलपुर के नवगछिया क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में दंपति पुरनी देवी और सुनील दास की मौत से गांव में मातम छा गया। दोनों की अर्थी एक साथ उठी तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और चार बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया।

बिहार न्यूज

25-Feb-2026 10:11 PM

By First Bihar

BHAGALPUR: भीषण सड़क हादसे में भागलपुर के नवगछिया के रहने वाले दंपति सुनील दास और पुरन देवी की मौत हो गयी. इस घटना से  इस्माइलपुर पूर्वी भिट्ठा गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। दोनों पति-पत्नी का शव जब गांव पहुंचा तब माहौल गमगीन हो गया। घर में चीक पुकार मच गया। परिजनों के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गमगीन माहौल में एक साथ दोनों की अर्थी उठी। लोगों ने नम आंखों से दोनों को विदा किया। 


बताया जाता है कि 24 फरवरी को बिहपुर के दयालपुर में भीषण सड़क हादसे में दोनों पति-पत्नी की दर्दनाक मौत हो गयी थी। बुधवार को गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सुबह होते ही मृतक के घर पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई शोक में डूबे परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचा था। बच्चों को रोता देख अनवरत वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गयी। 


मृतक दंपति के चार पुत्र हैं..ब्रजेश, छगुरी, रोहित और छोटू। इनमें रोहित और छोटू नाबालिग हैं। छोटू, जो सातवीं कक्षा में पढ़ता है, अपनी मां के शव को झकझोरते हुए बार-बार उठने के लिए कह रहा था। वह बिलखते हुए पूछ रहा था कि अब उसे खाना कौन खिलाएगा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। 


दंपति की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार को गांव में किसी के घर चूल्हा नहीं जला। ग्रामीणों का कहना था कि सुनील दास मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। दंपति सभी के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे।मृतक दंपति का तीसरा बेटा रोहित बंगलौर में मजदूरी करता है। माता-पिता की मौत की खबर मिलते ही वह घर के लिए रवाना हो गया। परिजनों ने उसके आने का इंतजार किया, लेकिन देर होने की आशंका के चलते अंतिम संस्कार कर दिया गया।


इस दर्दनाक हादसे ने चारों बच्चों को अनाथ कर दिया। बड़े बेटे ब्रजेश की शादी हो चुकी है और अब तीनों छोटे भाइयों की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई है। अंतिम संस्कार के दौरान बड़े बेटे ब्रजेश ने पिता को और छोटे बेटे छोटू ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। अर्थी उठते ही गांव का हर व्यक्ति भावुक हो उठा। महिलाएं रो-रोकर कह रही थीं कि बच्चे अब अनाथ हो गए। गांव के लोगों ने परिवार को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया और अंतिम संस्कार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।