Bihar Flood Alert: भागलपुर जिले में पिछले 48 घंटे से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहे जलस्तर ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का पानी खतरे के निशान को पार कर सर्वकालिक उच्चतम जलस्तर (HFL) के बेहद करीब पहुंच गया है। यदि जलस्तर बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही, तो भागलपुर में गंगा 2021 के सर्वकालिक उच्चतम जलस्तर का रिकॉर्ड तोड़ सकती है।



केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट और पटना में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने भागलपुर डिवीजन को अलर्ट जारी किया है। विभाग ने कार्यपालक अभियंताओं को तटबंधों पर कनीय अभियंताओं (JE) की तैनाती करने और जलस्तर की हर घंटे रिपोर्ट लेने का निर्देश दिया है। विभाग और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।


भागलपुर में रिकॉर्ड से महज 60 सेंटीमीटर दूर गंगा

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भागलपुर में गंगा का सर्वकालिक उच्चतम जलस्तर 34.86 मीटर है। यह रिकॉर्ड वर्ष 2021 की बाढ़ के दौरान दर्ज किया गया था। वर्तमान में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 33.68 मीटर से 58 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 34.26 मीटर हो गया है। यानी नदी का पानी अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड से महज 60 सेंटीमीटर नीचे है।



मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान ने बताया कि जल संसाधन विभाग स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए विभाग में नए रिकॉर्ड बनने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है।



सुल्तानगंज और कहलगांव में भी स्थिति गंभीर

सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 34.50 मीटर से 1.92 मीटर ऊपर पहुंचकर 36.42 मीटर पर बह रहा है। यहां पानी सर्वकालिक उच्चतम जलस्तर से महज 33 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं, कहलगांव में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 31.09 मीटर से 1.28 मीटर ऊपर पहुंचकर 32.37 मीटर हो गया है। यहां सर्वकालिक उच्चतम जलस्तर 32.87 मीटर है और नदी का पानी HFL से महज 50 सेंटीमीटर नीचे है।



तटबंधों पर बढ़ाई जा रही निगरानी

गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। तटबंधों की सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ाई जा रही है और अधिकारियों को लगातार जलस्तर की रिपोर्ट लेने का निर्देश दिया गया है।



जल विशेषज्ञों के अनुसार, तटबंधों की ऊंचाई और सुरक्षा व्यवस्था सामान्यतः क्षेत्र में दर्ज उच्चतम जलस्तर को ध्यान में रखकर तय की जाती है। सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता गोपाल चंद्र मिश्रा के मुताबिक, यदि इस बार गंगा का जलस्तर नया रिकॉर्ड बनाता है, तो भविष्य में तटबंधों और अन्य सुरक्षात्मक ढांचों में बड़े बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है।