Bihar Crime : भागलपुर जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र से पांच मासूम बच्चियों के अचानक लापता होने की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। वार्ड संख्या-1 की रहने वाली ये बच्चियां बुधवार देर रात रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं। गुरुवार सुबह जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिवार वाले रातभर बच्चियों की तलाश करते रहे, लेकिन उनका अबतक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।


लापता बच्चियों की उम्र करीब 8 से 10 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इनमें पल्लवी, गंगा और श्वेता समेत पांच बच्चियां शामिल हैं। सभी एक ही गांव की रहने वाली थीं और आपस में अच्छी दोस्त थीं। परिजनों के अनुसार बुधवार रात करीब 11 बजे के बाद से बच्चियां अचानक घर से गायब हैं। जब काफी देर तक उनका पता नहीं चला तो परिवार वालों ने आसपास खोजबीन शुरू की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।


इस मामले में गांव की एक बच्ची संध्या ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने बताया कि पल्लवी उसके साथ पढ़ती है और उसने उसे भी साथ चलने के लिए कहा था। संध्या के मुताबिक बच्चियों को कहीं जाने के बदले “बहुत सारे पैसे” मिलने की बात कही गई थी। हालांकि संध्या उनके साथ नहीं गई। उसके इस बयान के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और लोगों की चिंता और बढ़ गई है।


परिजनों का आरोप है कि घटना की जानकारी रात में ही पुलिस को दी गई थी, लेकिन समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई गई। उनका कहना है कि अगर पुलिस तत्काल सक्रिय होती तो शायद बच्चियों का जल्दी पता चल सकता था। गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग नाथनगर थाना पहुंचे और पुलिस से बच्चियों को जल्द खोजने की मांग की। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है।


घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मोहल्ले के लोग अपने बच्चों को लेकर डरे हुए हैं। कई परिवारों ने बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया है। लोगों को आशंका है कि कहीं बच्चियां किसी मानव तस्कर गिरोह के चंगुल में तो नहीं फंस गईं। पुलिस फिलहाल आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और बच्चियों की तलाश में छापेमारी की बात कह रही है।


इस घटना ने हाल ही में मोतिहारी में सामने आए मानव तस्करी के मामले की याद भी ताजा कर दी है। कुछ दिन पहले बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल ने 21 बच्चों को तस्करों के चंगुल से बचाया था। उस दौरान बच्चों को पढ़ाई और मेडिकल की तैयारी कराने का झांसा देकर बाहर ले जाया जा रहा था। आरपीएफ की जांच में बच्चों को ले जाने वालों के पास कोई वैध पहचान पत्र नहीं मिला था। बचाए गए बच्चों में 5 लड़कियां और 16 लड़के शामिल थे, जिनकी उम्र 4 से 18 वर्ष के बीच थी।


भागलपुर की इस घटना के बाद एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजन प्रशासन से जल्द कार्रवाई और बच्चियों की सुरक्षित बरामदगी की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही बच्चियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।