BEGUSARAI: बेगूसराय जिले के वीरपुर प्रखंड क्षेत्र में सड़क की बदहाली के खिलाफ ग्रामीणों ने विरोध का एक अनोखा और व्यंग्यात्मक तरीका अपनाया है। पर्रा पंचायत के आक्रोशित ग्रामीणों ने पर्रा-सरौंजा सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों का नामकरण ही जनप्रतिनिधियों और मंत्री के नाम पर कर दिया। ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों को विधायक, सांसद और पथ निर्माण मंत्री के नाम से जोड़कर अपना आक्रोश जाहिर किया है। विरोध का यह अनोखा अंदाज अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों ने सड़क पर बने गड्ढों को 'कुंदन कुमार कुंड', 'गिरिराज सिंह कुंड' और 'कुमार शैलेंद्र कुंड' नाम दिया है। इसके जरिए ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक कुंदन कुमार, सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और पथ निर्माण मंत्री शैलेंद्र कुमार तक अपनी नाराजगी पहुंचाने की कोशिश की है।
ग्रामीण ऋषभ कुमार ने बताया कि पर्रा-सरौंजा सड़क पिछले कई दशकों से जर्जर स्थिति में थी। पूर्व विधायक अमिता भूषण के अथक प्रयासों से इस सड़क का पुनर्निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्ष 2020 में कुंदन सिंह के विधायक बनने के बाद पिछले छह वर्षों से सड़क की स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई। नतीजतन सड़क एक बार फिर बदहाल हो गई है और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पर्रा पंचायत को मॉडल पंचायत कहा जाता है, लेकिन यहां सड़क की हालत ऐसी है कि यह समझना मुश्किल हो गया है कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढे। सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, ग्रामीण पप्पू सहनी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सड़क की बदहाली से लोग बेहद परेशान हैं। नेता सिर्फ वोट मांगने के समय गांव पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनता की समस्याओं को देखने तक नहीं आते। अब ग्रामीण चुप बैठने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
पर्रा पंचायत के ग्रामीणों ने सांसद, स्थानीय विधायक और पथ निर्माण मंत्री से पर्रा-सरौंजा सड़क का अविलंब पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे संगठित होकर जोरदार आंदोलन करेंगे।
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के दौरान बबलू सहनी, अबिंद यादव, रंजीत सहनी, मोगल सहनी, संजीत सहनी, संजय कुमार समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। अब सवाल यह है कि गड्ढों को नेताओं के नाम से पुकारने के बाद क्या जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की नींद खुलेगी या ग्रामीणों को अपनी सड़क के लिए आंदोलन का रास्ता ही अपनाना पड़ेगा?