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21-Mar-2026 02:49 PM
By HARERAM DAS
BEGUSARAI: बेगूसराय से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बखरी विधायक सह गन्ना मंत्री संजय पासवान के अचानक सदर अस्पताल पहुंचने से स्वास्थ्य महकमे में अफरा-तफरी मच गई। मामला एक महिला मरीज के कथित उपेक्षा से जुड़ा है, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, नावकोठी थाना क्षेत्र के पीरनगर गम्हरिया वार्ड संख्या-7 निवासी चंद्रभूषण पासवान की 48 वर्षीया पत्नी रेणु देवी हृदय रोग से पीड़ित थीं। परिजनों ने पहले उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर बीती रात करीब 1:30 बजे उन्हें बेहतर इलाज के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद पूरी रात मरीज को न तो कोई डॉक्टर देखने आया और न ही समुचित इलाज की व्यवस्था कराई गई। हालत बिगड़ता देख परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसकी शिकायत सीधे मंत्री संजय पासवान से कर दी।
शिकायत मिलते ही मंत्री संजय पासवान बिना देर किए सदर अस्पताल पहुंच गये। वहां उन्होंने मरीज और परिजनों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। लापरवाही के आरोपों को देखकर मंत्री का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मौके पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों की कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मरीज को तत्काल बेहतर इलाज नहीं मिला तो दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री के इस औचक निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भेजा गया। जिसके बाद मरीज के इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई। मेरे क्षेत्र के मरीज हैं। इलाज के लिए सदर अस्पताल में आए हैं। सिविल सर्जन से बात किये है। डॉक्टर थे लेकिन कहना था कि ईद की छुट्टी है, हमने कहा कि हॉस्पिटल है ईद की छुट्टी मनाने का थोड़े है। हमने उन्हें गंभीरता से लेने को कहा है। समुचित इलाज के लिए कहा है। ईद तो हम सब लोग मनाते हैं लेकिन मरीज का इलाज भी होना चाहिए।
मंत्री संजय पासवान ने आगे कहा कि हमको यह बात सुनने को मिला था कि कोई डॉक्टर मरीज को देखने तक नहीं आया था। सिविल सर्जन ने कहा है कि हम इसे दिखा लेते हैं। अन्य मरीज के परिजनों की शिकायत थी कि बाथरुम में पानी तक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। कुछ डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से घटनाए हो जाती है। कोताही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और जवाबदेही पर सवाल खड़ा किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अस्पताल प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।