Bihar Liquor Ban : बिहार में शराबबंदी लागू हुए कई साल गुजर चुके हैं। सरकार लगातार दावा करती है कि शराब के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसा जा रहा है। पुलिस और उत्पाद विभाग की टीमें छापेमारी कर रही हैं, शराब जब्त हो रही है और तस्करों को जेल भी भेजा जा रहा है। लेकिन इन तमाम दावों के बीच शराब तस्करों के नए-नए कारनामे एक बार फिर व्यवस्था की परीक्षा लेते नजर आ रहे हैं। कभी एंबुलेंस में शराब मिलती है, कभी ट्रक के तहखाने में, तो कभी दूध और सब्जी के वाहनों में शराब की खेप पकड़ी जाती है। अब बेगूसराय में तस्करों ने कंटेनर के नीचे ही ऐसा गुप्त तहखाना बना दिया कि पहली नजर में किसी को भनक तक नहीं लगे।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिहार में शराब की खरीद-बिक्री और परिवहन पर पूरी तरह रोक है, तो आखिर मेघालय से विदेशी शराब की इतनी बड़ी खेप बिहार तक कैसे पहुंच गई? क्या शराबबंदी का डर सिर्फ छोटे शराब कारोबारियों तक सीमित रह गया है और बड़े तस्कर नए-नए रास्ते निकालकर अपना कारोबार चला रहे हैं?
कंटेनर के नीचे बना रखा था शराब का गुप्त अड्डा
बेगूसराय के तेघड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-28 पर मरसैती के पास उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छह चक्का कंटेनर को पकड़ा। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य मालवाहक वाहन लग रहा था। लेकिन इसके नीचे शराब छिपाने के लिए खास इंतजाम किया गया था।
तस्करों ने कंटेनर के निचले हिस्से में खलासी की तरफ गेट के पास एक विशेष तहखाना बनवा रखा था। इसी तहखाने में विदेशी शराब की पेटियां छिपाकर रखी गई थीं। उत्पाद विभाग की टीम ने जब वाहन की बारीकी से तलाशी ली तो तस्करी का पूरा खेल सामने आ गया। गुप्त तहखाने से कुल 180 पेटी विदेशी शराब बरामद की गई। बरामद शराब में ऑफिसर्स चॉइस, मैकडॉवेल और रॉयल स्टैग जैसे कई ब्रांड शामिल हैं। यानी शराबबंदी वाले बिहार में शराब पहुंचाने के लिए तस्करों ने बाकायदा कंटेनर को ही चलता-फिरता गोदाम बना दिया था।
मेघालय से बिहार तक कैसे पहुंची शराब की खेप?
इस कार्रवाई में गिरफ्तार चालक की पहचान समस्तीपुर जिले के शाहपुर पटोरी निवासी बसंत राय के पुत्र जितेंद्र राय के रूप में हुई है। जब्त कंटेनर का रजिस्ट्रेशन नंबर BR 33 GC 3989 बताया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने अधिकारियों को बताया कि उसने रास्ते में कंटेनर रिसीव किया था। इस बयान ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। विभाग को आशंका है कि मेघालय से बिहार आने के दौरान रास्ते में कंटेनर का चालक बदला गया होगा। हालांकि, इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
अब सवाल यह है कि अगर चालक ने रास्ते में गाड़ी रिसीव की थी तो उससे पहले वाहन कौन चला रहा था? शराब की खेप किसने लोड कराई थी? मेघालय से बिहार तक इस कंटेनर को सुरक्षित पहुंचाने के लिए कौन-कौन लोग सक्रिय थे? क्या इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह काम कर रहा है?
जीरो माइल, बरौनी और बछवाड़ा तक पहुंचनी थी खेप
उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि मेघालय से विदेशी शराब की बड़ी खेप बेगूसराय के रास्ते बिहार लाई जा रही है। आशंका थी कि शराब को जीरो माइल, बरौनी और बछवाड़ा इलाके में पहुंचाया जाना था। वहां से इसे दूसरे इलाकों में भी सप्लाई किया जा सकता था।
सूचना मिलते ही मध्य निषेध अधीक्षक सुमन कुमार सिंह के निर्देश पर अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। संभावित रास्तों पर घेराबंदी की गई। एक टीम तेघड़ा इलाके में पहले से सक्रिय थी, जबकि दूसरी टीम को संभावित निकास मार्ग पर तैनात किया गया था, ताकि कंटेनर दूसरे जिले में प्रवेश नहीं कर सके। आखिरकार मरसैती के पास कंटेनर को दोनों तरफ से घेरकर रोक लिया गया। तलाशी के दौरान 180 पेटी शराब बरामद हुई और चालक को गिरफ्तार कर लिया गया।
शराबबंदी के दावों के बीच तस्करों का नया जुगाड़!
इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिहार की शराबबंदी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार शराबबंदी को सामाजिक सुधार का बड़ा अभियान बताती रही है। इसके समर्थन में लगातार जागरूकता अभियान और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई भी होती है। लेकिन दूसरी तरफ तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं।
कभी ट्रक के डबल फ्लोर में शराब छिपाई जाती है तो कभी गाड़ियों में गुप्त बॉक्स बनाए जाते हैं। अब कंटेनर के नीचे तहखाना बनाकर 180 पेटी शराब ले जाने की कोशिश की गई। यह सिर्फ शराब की बरामदगी का मामला नहीं है, बल्कि तस्करों के नेटवर्क और उनकी तैयारी की भी कहानी बयां करता है।
सवाल यह भी है कि आखिर शराब की इतनी बड़ी खेप को बिहार की सीमा तक पहुंचाने में कितने चेकिंग पॉइंट पार करने पड़े होंगे? रास्ते में किसी की नजर इस विशेष कंटेनर पर क्यों नहीं पड़ी? क्या तस्कर पुलिस की निगरानी से बचने के लिए लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं या फिर कहीं न कहीं निगरानी व्यवस्था में भी खामियां हैं? बेशक, उत्पाद विभाग की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा सकता है, लेकिन 180 पेटी शराब पकड़ने के साथ यह जानना भी जरूरी है कि ऐसी खेप बिहार तक पहुंचने से पहले कितनी बार निकल चुकी होगी।
अब चालक नहीं, पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती
मध्य निषेध अधीक्षक सुमन कुमार सिंह ने बताया कि जिला पदाधिकारी के निर्देश पर जिलेभर में अवैध शराब के खिलाफ लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। गुरुवार की रात से ही अलग-अलग टीमें सक्रिय थीं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संवेदनशील इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया गया।
उन्होंने बताया कि इस मामले में सिर्फ चालक की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। कंटेनर मालिक के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शराब कहां से लोड हुई, किसने भेजी, किसके पास पहुंचनी थी और इस कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच की जाएगी। मद्य निषेध विभाग, पटना की टीम के सहयोग से पूरे मामले का बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगाला जाएगा। अब देखने वाली बात होगी कि जांच में सिर्फ कंटेनर चालक तक ही कार्रवाई सीमित रहती है या फिर मेघालय से बिहार तक फैले कथित शराब तस्करी नेटवर्क के बड़े चेहरे भी सामने आते हैं।
क्योंकि शराबबंदी की असली सफलता केवल शराब की पेटियां जब्त करने और चालकों को गिरफ्तार करने में नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को तोड़ने में है जो बार-बार बिहार में शराब पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल बेगूसराय की यह बरामदगी एक बार फिर यही सवाल छोड़ गई है कि जब बिहार में शराबबंदी है, तो शराब तस्करों का यह कारोबार आखिर बंद क्यों नहीं हो रहा?